Mumbai underworld Don Story: देश का वह अंडरवर्ल्ड डॉन, जिसके दुश्मनी और दोस्ती दोनों दाऊद इब्राहिम के साथ रही. वह अंडरवर्ल्ड डॉन जिस पर एक बार नहीं बार-बार हमले हुए, लेकिन वह हार बार जिंदा निकल जाता. वह डॉन अब 68 साल का हो गया है और इस समय भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के पहरे में रह रहा है.
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अंडरवर्ल्ड डॉन की कहानी:
देश का वह अंडरवर्ल्ड डॉन, जिसकी कहानी किसी हॉलीवुड या बॉलीवुड मूवी के हीरो से कम सस्पेंस और थ्रिलर पैदा नहीं करता है. जिस डॉन ने मौत को एक बार नहीं दर्जनों बार चकमा दिया हो. वह डॉन जो किसी न किसी तरकीब से हर बार पुलिस और जांच एजेंसियों के चंगुल से हर बार बचकर बाहर निकल जाता था. वह डॉन एक फोन कॉल की वजह से कैसे पकड़ा गया? जो हमेशा वीआईपी नंबर से कॉल करता था, वह वॉट्सऐप कॉल के चक्कर में फंसकर कैसे गिरफ्तार हो गया? जिस डॉन को हत्या के मामले में कोर्ट से जमानत मिल गई, वह डॉन फिरौती, जबरन वसूली और हत्या के अन्य मामलों कैसे फंसता चला गया? जानिए उस ‘अमर डॉन’ की कहानी और उसके लिए कौन रखते हैं हमदर्दी? वह डॉन अब कहां और किस हालात में है?
अंडरवर्ल्ड की दुनिया में जहां दुश्मनी का मतलब मौत होता है, वहां एक नाम ऐसा है जो बार-बार मौत को चकमा देता रहा. उस डॉन का असली नाम राजेंद्र सदाशिव निकालजे, जिसे भारत में छोटा राजन के नाम से लोग जानते हैं. आज 68 साल की उम्र में भी यह डॉन तिहाड़ जेल की हाई-सिक्योरिटी बैरक में सांस ले रहा है. लेकिन उसकी जिंदगी मौत की अफवाहों से भरी पड़ी है. दर्जनों बार मौत की खबरें आईं. कभी दुबई में गोली लगने की, कभी बैंकॉक में हार्ट अटैक की तो 2021 के कोरोना काल में दिल्ली के एम्स में मरने की खबर. हर बार वह लौट आया, जैसे मौत भी उससे डरती
वह अंडरवर्ल्ड डॉन, जिसपर कई बार हुए हमले
लेकिन सवाल वही पुराना कि छोटा राजन को कैसे भारत की जांच एजेंसियों ने जाल में फंसाया? मुंबई के तिलक नगर की गलियों से निकलकर छोटा राजन ने 1980 के दशक में अंडरवर्ल्ड में कदम रखा. शुरू में दाउद इब्राहिम की डी-कंपनी का हिस्सा बना. छोटा राजन पर स्मगलिंग, एक्सटॉर्शन और फिल्म इंडस्ट्री पर रंगदारी जैसे कई मामलों एफआईआर दर्ज हुई. लेकिन 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट्स के बाद सब बदल गया. दाउद के पाकिस्तान भागने पर राजन ने विद्रोह कर दिया. ‘हिंदू डॉन’ बनकर वह दाउद का कट्टर दुश्मन हो गया.
90 के दशक में मुंबई के सड़कों पर खूनी गैंगवार
90 के दशक में मुंबई की सड़कों पर खूनी गैंगवार छिड़ गया. राजन के गैंग ने दाउद के कई गुर्गों को मार गिराया, जबकि दाउद ने राजन पर कई हमले करवाए. राजन पर हत्या, एक्सटॉर्शन, ड्रग ट्रैफिकिंग के दर्जनों केस दर्ज हो चुके थे. 1998 में भारत छोड़कर दुबई, फिर बैंकॉक, ऑस्ट्रेलिया तक भटका. लेकिन भारत की एजेंसियां पीछा करती रहीं
कैसे आया भारतीय एजेंसियों के चंगुल में
25 अक्टूबर 2015 को इंडोनेशिया के बाली एयरपोर्ट छोटा राजन जो ‘मोहन कुमार’ नाम से ऑस्ट्रेलिया से उड़ान भरकर आया था. उससे इमिग्रेशन काउंटर पर गलती हो गई. उसने अपना असली नाम राजेंद्र सदाशिव निकालजे बता दिया. यह शायद भारत आने का कोड था, लेकिन पहले ही पकड़ा गया. ऑस्ट्रेलियन इंटेलिजेंस की टिप से इंडोनेशियन पुलिस ने उसे हिरासत में लिया. सीबीआई और इंटरपोल ने सालों से रेड कॉर्नर नोटिस जारी रखा था. उस समय के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे ‘मेजर सक्सेस’ बताया. 6 नवंबर को इंडियन एयर फोर्स जेट से दिल्ली लाया गया. एयरपोर्ट पर उतरते ही राजन ने जमीन चूम ली. कहा गया, देशभक्ति का इशारा. जांच एजेंसियां मानती हैं कि राजन कभी-कभी भारतीय खुफिया तंत्र को दाउद की खबरें देता था, लेकिन अपराधों की लंबी लिस्ट ने उसे बख्शा नहीं
छोटा राजन से किसकी हमदर्दी?
छोटा राजन की गिरफ्तारी के बाद उसके खिलाफ महाराष्ट्र खासकर मुंबई पुलिस के 71 केस सीबीआई को ट्रांसफर हो गए. इसलिए राजन को मुंबई की बजाय दिल्ली के हाई-सिक्योरिटी बैरक तिहाड़ जेल नंबर-2 में रखा गया. जहां आज भी आईटीबीपी और सीआरपीएफ की नजरें 24 घंटे उसपर रहती हैं. कहा तो यह जाता है कि उसे दाऊद के गुर्गे से बचाने के लिए यह सुरक्षा मिली हुई है. राजन को आज भी तिहाड़ में अलग कुक, अलग वॉर्डन मिला हुआ है. साल 2019 में जहर देने की धमकी के बाद छोटा राजन की सिक्योरिटी और टाइट कर दी गई है. अप्रैल 2024 में पहली बार जेल से उसकी फोटो जारी हुई थी, जिसमें वह स्वस्थ दिखा. जनवरी 2025 में साछोटा राजन आज भी जिंदा है, लेकिन जेल की सलाखों में कैद है. आज भी तिहाड़ की कोठरी में बैठे 68 साल के इस डॉन की स्टोरी खत्म नहीं हुई. सुप्रीम कोर्ट की नजर, सीबीआई की जांच और दाउद का छाया आज भी छोटा राजन पर मंडरा रहा है. अंडरवर्ल्ड की दुनिया में शायद ही वह कभी लौटे, लेकिन इस क्राइम लीजेंड की कहानी मुंबई की सर्द रातों को आज भी सिहरन देती है.इनस सर्जरी के लिए एम्स गया, लेकिन कोरोना काल की तरह अफवाहें फिर उड़ीं. लेकिन इस बार भी मरने की खबर अफवाह ही रहीं
