Thursday, February 19
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VISHNU AGARWAL EDITOR DAILY INDIATIMES DIGITAL JOURNALISM PLATFORM

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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, Rule 94(c) के तहत विपक्षी सांसदों ने किए हस्ताक्षरविपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ Rule 94(c) के तहत अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंपा. नोटिस पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं. नोटिस देने के दौरान कांग्रेस के साथ SP, Left और RJD नेता मौजूद थे, जबकि TMC ने हस्ताक्षर नहीं किए.

लोकसभा में विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ Rule 94(c) के तहत अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंपा है. इस नोटिस पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जिसमें कांग्रेस, SP, Left, RJD समेत लगभग सभी विपक्षी दल शामिल हैं. हालांकि TMC ने इस नोटिस से दूरी बनाई है. 

कांग्रेस सांसदों ने सौंपा नोटिसनोटिस देने के लिए कांग्रेस सांसद सुरेश कोडिकुन्निल, गौरव गोगोई,मोहम्मद जावेद लोकसभा महासचिव के पास पहुंचे थे. 

क्यों नाराज है विपक्ष?

लोकसभा में विपक्ष और खासकर कांग्रेस, स्पीकर ओम बिरला की टिप्पणी को लेकर लगातार नाराजगी जता रहा है। हाल ही में राहुल गांधी के भाषण के दौरान उठे बवाल के बाद से यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सूत्रों के अनुसार, विपक्ष जल्द ही लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) पेश कर सकता है।

कांग्रेस का आरोप है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने नियमों का हवाला देकर राहुल गांधी का भाषण पूरा होने नहीं दिया। वहीं, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कुछ किताबों का संदर्भ देकर इंदिरा गांधी समेत कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्री पर निशाना साधा

हंगामे की वजह से 8 सांसद सस्पेंड

इस हंगामे के चलते, लोकसभा में कांग्रेस सहित कुल 8 सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित (Suspended) कर दिया गया। कांग्रेस इस बात से भी नाराज है कि स्पीकर ने सदन में यह दावा किया कि कांग्रेस के कई सदस्य प्रधानमंत्री के आसन के पास पहुंच कर कोई अप्रत्याशित घटना कर सकते हैं। इसके बाद स्पीकर ने प्रधानमंत्री से सदन में न आने का आग्रह किया।

अविश्वास प्रस्ताव कैसे लाया जा सकता है?

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के लिए विपक्ष को एक आवेदन देना होता है। इस आवेदन पर कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर होने अनिवार्य हैं। वर्तमान में इंडिया गठबंधन के पास 232 सांसद हैं, यानी विपक्ष के पास प्रस्ताव लाने के लिए पर्याप्त संख्या मौजूद है।

लोकसभा में पीएम केयर्स फंड से जुड़े सवालों का नहीं मिलेगा जवाब

भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने लोकसभा सचिवालय से कहा है कि सदन में पीएम केयर्स फंड, पीएम नेशनल रिलीफ फंड और नेशनल डिफेंस फंड से जुड़े सवाल और मुद्दे स्वीकार नहीं किए जांएगे. इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने अपनी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में यह जानकारी साझा की है. 

रिपोर्ट के मुताबिक, पीएमओ ने लोकसभा सचिवालय से कहा कि इन तीनों फंड से जुड़े सवालों की, लोकसभा के प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमों के नियम 41(2) (viii) और 41(2) (xvii) के तहत अनुमति नहीं है. इंडियन एक्सप्रेस ने इस मामले पर पीएमओ से ईमेल के माध्यम से सवाल पूछे लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

पीएम केयर्स फंड की स्थापना मार्च, 2020 में कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद की गई थी. इसे कोविड जैसी आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए बनाया गया था. इसे पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में रजिस्टर किया गया था और कोरोना महामारी के दौर में विभिन्न कंपनियों ने करोड़ों रुपये इस फंड में दान किए थे. 

हालांकि, विपक्षी पार्टियों ने इसकीपारदर्शिता पर सवाल उठाए थे. इसे लेकर कोर्ट में याचिकाएं भी दायर हुईं, जिनके जवाब में केंद्र सरकार ने कहा कि इस फंड को संविधान या किसी संसदीय कानून के तहत नहीं बनाया गया है. तब सरकार ने यह भी कहा था कि पीएम केयर्स फंड, सूचना के अधिकार (आरटीआई) के दायरे में भी नहीं आता.

सावधान! आपका WhatsApp हो सकता है हैक, जान लें राजस्थान पुलिस की नई सुरक्षा गाइडलाइन

साइबर अपराधी बेहद शातिर तरीके से आपके फोन में सेंध लगाते हैं। राजस्थान पुलिस ने एक विशेष एडवाइजरी जारी कर प्रदेशवासियों को सचेत किया है।

डिजिटल इंडिया के इस दौर में साइबर अपराधियों ने ठगी का नया और सबसे आसान रास्ता खोज लिया है — आपका व्हाट्सएप अकाउंट ( WhatsApp Account ) । महानिदेशक पुलिस ( साइबर क्राइम ) के निर्देशानुसार राजस्थान पुलिस ने एक विशेष एडवाइजरी जारी कर प्रदेशवासियों को सचेत किया है। उपमहानिरीक्षक पुलिस (साइबर क्राइम) विकास शर्मा के अनुसार, ठग अब आपके अकाउंट का पूर्ण एक्सेस लेकर आपके परिजनों से पैसों की मांग कर रहे हैं और बैंकिंग धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं।

साइबर ठगों का ‘ट्रैप’: कैसे फंसते हैं आप?

साइबर अपराधी बेहद शातिर तरीके से आपके फोन में सेंध लगाते हैं। इसके लिए वे मुख्य रूप से तीन तरीकों का इस्तेमाल करते हैं:

1.अनजान लिंक: लुभावने ऑफर्स या डराने वाले संदेशों के साथ भेजे गए लिंक।

2.फर्जी कॉल: बैंक अधिकारी या सरकारी कर्मचारी बनकर ओटीपी मांगना।

3स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स: किसी समस्या के समाधान के नाम पर ‘AnyDesk’ या ‘TeamViewer’ जैसे ऐप्स इंस्टॉल करवाकर आपके फोन का रिमोट कंट्रोल लेना।व्हाट्सएप हैक के बाद क्या

व्हाट्सएप हैक के बाद क्या करते हैं अपराधी?

जैसे ही ठगों को आपके व्हाट्सएप का नियंत्रण मिलता है, वे सबसे पहले आपके ‘कॉन्टैक्ट लिस्ट’ में मौजूद लोगों को इमरजेंसी मैसेज भेजते हैं। वे आपकी ओर से एक्सीडेंट या अस्पताल का बहाना बनाकर आपके दोस्तों और रिश्तेदारों से पैसे मांगते हैं। इसके अलावा, आपके मोबाइल में मौजूद यूपीआई (UPI) और बैंकिंग ऐप्स का डेटा चोरी कर चंद मिनटों में आपका खाता साफ कर दिया जाता है।

हैक हुआ अकाउंट कैसे करें रिकवर? (राजस्थान पुलिस की ‘रिकवरी गाइड’)

यदि आपका व्हाट्सएप हैक हो गया है, तो घबराएं नहीं। पुलिस ने इसे वापस पाने के लिए निम्नलिखित चरण (Steps) बताए हैं:

1.अनइंस्टॉल और सिम रिमूवल: सबसे पहले अपने फोन से व्हाट्सएप को Uninstall कर दें और सिम कार्ड बाहर निकाल लें।

2.एंटीवायरस स्कैन: मोबाइल को वाई-फाई से जोड़ें और प्ले-स्टोर से एक भरोसेमंद एंटीवायरस डाउनलोड कर Full Scan करें। जो भी संदिग्ध फाइल्स या ‘बोट्स’ मिलें, उन्हें तुरंत डिलीट करें

3 सेटिंग्स में बदलाव: फोन की सेटिंग्स में जाकर ‘Install from unknown sources’ को Disable करें। इसके बाद अपने फोन में कॉल या एसएमएस फॉरवर्डिंग की जांच करें। यदि यह चालू है, तो कोड ##002# डायल कर इसे बंद करें।

4.सिम का उपयोग: अब अपनी सिम को किसी दूसरे साधारण (Keypad) फोन में डालें।

5.पुनः इंस्टॉलेशन: अपने स्मार्टफोन में व्हाट्सएप फिर से इंस्टॉल करें।

6.Call Me’ विकल्प चुनें: वेरिफिकेशन के समय ओटीपी एसएमएस के बजाय ‘Call me’ विकल्प को चुनें। अब आपके साधारण फोन पर एक कॉल आएगी, जिसमें कोड बताया जाएगा। इस कोड को स्मार्टफोन में दर्ज करते ही आपका अकाउंट आपके नियंत्रण में आ जाएगा।

भविष्य के लिए सुरक्षा मंत्र

पुलिस ने अपील की है कि व्हाट्सएप की ‘Two-Step Verification’ सुविधा को हमेशा ऑन रखें। साथ ही, किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी (OTP), पिन या स्क्रीन साझा न करें। यदि कोई परिचित भी व्हाट्सएप पर अचानक पैसों की मांग करे, तो उसे पैसे भेजने से पहले कॉल कर पुष्टि जरूर करें।

यहाँ तुरंत दें सूचना: हेल्पलाइन नंबर्स

यदि आप किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी का शिकार होते हैं, तो बिना समय गंवाए इन नंबरों पर संपर्क करें:

ऑनलाइन शिकायत:http://cybercrime.gov.in पर जाकर अपनी रिपोर्ट दर्ज कराएं।साइबर हेल्पलाइन नंबर: 1930विशेष संपर्क नंबर: 9256001930 / 9257510100

Rajasthan Panch Chunav 2026: राजस्थान में पंच बनने के लिए क्या है योग्यता?

Rajasthan Panch Ki Yogyata: पंच पद के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए। यानी 21 साल पूरे किए बिना कोई भी व्यक्ति चुनाव मैदान में नहीं उतर सकता।

Rajasthan panch Ki Yogyata: राजस्थान में एक बार फिर पंचायत चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। जल्द ही अगले कुछ महीनों में राज्य में पंचायत चुनाव करवाए जा सकते हैं। राज्य में पंचायती और जिला परिषदों के चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक कराने की योजना है। उससे पहले परिसीमन की प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 तक पूरी किए जाने का प्रस्ताव रखा गया था, ताकि नई सीमाओं के अनुसार चुनाव कराए जा सकें। खबरों की माने तो पंच और सरपंच पदों के चुनाव 20 मार्च 2026 तक कराए जा सकते हैं। इसके बाद पंचायत समितियों और जिला परिषदों के चुनाव अप्रैल महीने में होने की संभावना जताई जा रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राजस्थान में पंच का चुनाव लड़ने के लिए क्या योग्यता होनी चाहिए। आइये जानते हैं।

Rajasthan Panch Ki Yogyata: शैक्षिक योग्यता और आयु सीमा

पंच पद के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए। यानी 21 साल पूरे किए बिना कोई भी व्यक्ति चुनाव मैदान में नहीं उतर सकता। शैक्षिक योग्यता को लेकर पहले सख्ती थी, लेकिन पिछली सरकार ने इसमें ढील दी थी। फिलहाल चुनाव लड़ने के लिए किसी विशेष कक्षा पास होने की अनिवार्यता लागू नहीं है। जो चुनाव लड़ना चाहता हैं उसका उस पंचायत के वोटर लिस्ट में नाम होना जरुरी है, जहां से वो चुनाव लड़ने जा रहा है।

Rajasthan Panch Chunav 2026: घर में शौचालय होना जरुरी

संतान नियम को लेकर भी लंबे समय से चर्चा चल रही है। अभी तक स्थिति यही है कि जिन लोगों के दो से अधिक बच्चे हैं, वे चुनाव नहीं लड़ सकते। सरकार की ओर से इस प्रावधान में बदलाव पर विचार-विमर्श जरूर हुआ है, लेकिन अभी तक कोई नया कानून लागू नहीं किया गया है। एक और अहम शर्त है घर में शौचालय होना। यदि उम्मीदवार के घर में शौचालय नहीं है या परिवार के सदस्य खुले में शौच जाते हैं, तो यह चुनाव लड़ने में बाधा बन सकता है।

PM Jan Aushadhi Kendra : राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला, सभी जिला अस्पतालों में प्रधानमंत्री जनऔषधि केन्द्र होंगे शुरू, आदेश जारी

Pradhan Mantri Jan Aushadhi Kendra : राजस्थान सरकार ने सभी जिला अस्पतालों में प्रधानमंत्री जनऔषधि केन्द्र शुरू करने का फैसला लिया है। स्वास्थ्य विभाग ने आदेश जारी किए हैं। इससे इमरजेंसी दवा सूची के अलावा अन्य जरूरी दवाएं कम कीमत में उपलब्ध हो सकेंगी।

Pradhan Mantri Jan Aushadhi Kendra : अब प्रदेश के मरीजों को महंगी दवाओं के लिए जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी। राजस्थान सरकार ने सभी जिला अस्पतालों में प्रधानमंत्री जनऔषधि केन्द्र शुरू करने का फैसला लिया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि जिला अस्पताल परिसरों में जनऔषधि केन्द्र खोलने के लिए पात्र आवेदकों को प्राथमिकता के आधार पर स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।

इस निर्णय से इमरजेंसी दवा सूची के बाहर की कई जरूरी दवाएं भी कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगी। अब तक जिला अस्पतालों में मुख्य रूप से इमरजेंसी और सीमित दवाएं ही सरकारी स्तर पर उपलब्ध थीं, जबकि अन्य दवाओं के लिए मरीजों को बाहर की मेडिकल दुकानों पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे इलाज का खर्च बढ़ जाता था, खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों पर आर्थिक बोझ पड़ता था।

विभागीय आदेश के अनुसार, जनऔषधि केन्द्रों के संचालन में केंद्र सरकार की योजना के दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा। अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे आवेदन प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनावश्यक अड़चन न डालें और पारदर्शी तरीके से स्थान आवंटन करें। इससे जिले स्तर पर दवा उपलब्धता को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

जिला अस्पतालों में जनऔषधि केन्द्र अनिवार्य – जे.पी. नड्डा

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने हाल ही में राज्य के चिकित्सा मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में जिला अस्पतालों में जनऔषधि केन्द्र अनिवार्य रूप से शुरू करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आदेश जारी किए हैं।

Rajasthan Politics : जब गले मिले डोटासरा और राठौड़, मंच पर ठहाकों के बीच चले सियासी बाण, सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें

एक कार्यक्रम के दौरान इन दोनों नेताओं की ‘केमिस्ट्री’ ने हर किसी को हैरान कर दिया। सदन के भीतर ‘आंकड़े’ गिनाने वाले ये नेता यहाँ एक-दूसरे को ‘किस्से’ सुनाते और ठहाके लगाते नजर आए।

राजस्थान की राजनीति के दो सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी—भाजपा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा—जब एक ही मंच पर हों, तो चर्चा होना लाजिमी है। 8 फरवरी 2026 को सीकर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इन दोनों नेताओं की ‘केमिस्ट्री’ ने हर किसी को हैरान कर दिया। सदन के भीतर ‘आंकड़े’ गिनाने वाले ये नेता यहाँ एक-दूसरे को ‘किस्से’ सुनाते और ठहाके लगाते नजर आए।

राजेंद्र राठौड़ और गोविंद सिंह डोटासरा, दोनों ही शेखावाटी की राजनीति के धुरी माने जाते हैं। विधानसभा चुनाव से लेकर सदन की कार्यवाही तक, दोनों के बीच अक्सर तीखी नोकझोंक देखने को मिलती है। लेकिन रविवार को सीकर में नज़ारा बिल्कुल अलग था।जैसे ही दोनों नेता मिले, उन्होंने एक-दूसरे को गले लगाया और काफी देर तक गुफ्तगू करते रहे। इन तस्वीरों के सामने आते ही सोशल मीडिया पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई कि “राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन नहीं होता।”

मंच पर ‘तंज’ और ‘ठहाके’: शब्दों की बाजीगरी

मंच पर जब संबोधन की बारी आई, तो दोनों ने अपनी चिर-परिचित शैली में एक-दूसरे पर चुटीले तंज भी कसे।डोटासरा का अंदाज़: गोविंद सिंह डोटासरा ने अपने ठेठ राजस्थानी लहजे में राठौड़ की चुटकी लेते हुए कुछ ऐसी बातें कहीं कि पूरा पंडाल ठहाकों से गूँज उठा।राठौड़ का जवाब: राजेंद्र राठौड़, जो अपनी हाजिरजवाबी के लिए जाने जाते हैं, उन्होंने भी डोटासरा के वार को मुस्कुराहट के साथ झेला और पलटवार में ऐसी ‘गूगली’ डाली कि डोटासरा भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए

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