Rajasthan Panchayat and Nikay Chunav: राजस्थान हाईकोर्ट ने 31 जुलाई तक पंचायत-निकाय चुनाव कराने की डेडलाइन ‘लॉक’ कर दी है। ओबीसी आयोग को अब 20 जून तक रिपोर्ट देनी होगी। कोर्ट के इस फैसले के बाद भजनलाल सरकार के पास अब क्या-क्या ऑप्शन बचे हैं इस रिपोर्ट से जानते हैं।
VISHN AGARWAL/ JOURNALIST/RAJASTHAN NEWS/DAILY JAIPUR TIMES NEWS NETWORK
जयपुर: राजस्थान की सियासत और स्थानीय शासन को लेकर आज 22 मई का दिन बेहद ऐतिहासिक साबित हुआ है। पिछले कई महीनों से असमंजस के भंवर में फंसे पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों की तारीख आखिरकार राजस्थान हाईकोर्ट ने लॉक कर दी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने भजनलाल सरकार की ‘चुनाव टालने’ की अर्जी को सिरे से खारिज करते हुए 31 जुलाई 2026 तक हर हाल में चुनाव संपन्न कराने का आदेश दे दिया है
अदालत के इस कड़े रुख के बाद अब प्रदेश का राजनीतिक पारा अचानक चरम पर पहुंच गया है। आइए समझते हैं कि इस बड़े फैसले के मायने क्या हैं और अब भजनलाल सरकार का अगला कदम क्या हो सकता है।
हाईकोर्ट ने दिया भजनलाल सरकार को झटका
दरअसल, हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को ही आदेश दिया था कि 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव करा लिए जाएं। लेकिन राज्य सरकार ने भयंकर लू, आगामी मानसून और वार्डों के सीमांकन का हवाला देकर इस डेडलाइन को व्यावहारिक रूप से असंभव बताया और दिसंबर 2026 तक का वक्त मांग लिया।
कोर्ट ने ‘मौसम’ वाले तर्कों को पूरी तरह नकारा
ने ‘मौसम’ वाले तर्कों को पूरी तरह नकारा11 मई को सुरक्षित रखे गए फैसले को आज सुनाते हुए खंडपीठ ने सरकार के ‘मौसम’ वाले तर्कों को पूरी तरह नकार दिया। कोर्ट ने साफ किया कि जनता को उनके लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों से लंबे समय तक वंचित नहीं रखा जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने ओबीसी आयोग को भी 20 जून 2026 तक अपनी फाइनल रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं, ताकि आरक्षण का पेंच हमेशा के लिए सुलझ सके।
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हाईकोर्ट का यह फैसला पूरी तरह से बाध्यकारी है। अदालत ने बहुत स्पष्ट शब्दों में चुनाव संपन्न कराने के लिए 31 जुलाई 2026 की आखिरी तारीख तय कर दी है। इस समय-सीमा के भीतर सरकार को हर हाल में चुनाव कराने होंगे। इस आदेश के तहत अब पंचायत चुनाव और स्थानीय निकाय चुनाव दोनों ही एक साथ संपन्न कराए जाएंगे।
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प्रदेश में इन चुनावों का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। आज माननीय उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने राज्य सरकार को बड़ा निर्देश देते हुए 31 जुलाई तक निकाय और पंचायत चुनाव कराने को कहा है। इसके साथ ही ओबीसी कमीशन को भी 20 जून तक अपनी रिपोर्ट सबमिट करने की डेडलाइन दी गई है, जिसके तुरंत बाद चुनाव आयोग आगे की चुनावी प्रक्रिया शुरू करेगा। पहले 15 अप्रैल तक की समय-सीमा थी, लेकिन सरकार के एक्सटेंशन आवेदन पर विचार करते हुए कोर्ट ने अब यह अंतिम डेडलाइन तय कर दी है।
अब क्या होगा भजनलाल सरकार का अगला कदम?
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब राज्य सरकार के पास सीमित विकल्प बचे हैं। राजनीतिक गलियारों में सरकार के अगले कदमों को लेकर तीन मुख्य रणनीतियों पर चर्चा तेज है।
- सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना: हाईकोर्ट के फैसले के तुरंत बाद कानूनी जानकारों का मानना है कि सरकार इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर कर सकती है। सरकार वहां फिर से भीषण गर्मी में 3.4 लाख कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने की व्यावहारिक दिक्कतों और सुरक्षा व्यवस्था का तर्क देकर कुछ और समय मांग सकती है।
2.वार फुटिंग’ पर चुनाव की तैयारियों में जुटना: यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट नहीं जाती है, या वहां से राहत नहीं मिलती है, तो भजनलाल सरकार को राज्य निर्वाचन आयोग के साथ मिलकर तुरंत बैठक करनी होगी। चूंकि जून का महीना सिर पर है, इसलिए सरकार को युद्धस्तर पर 68 हजार से ज्यादा मतदान केंद्रों के लिए प्रशासनिक अमला तैनात करना होगा।
3.ओबीसी रिपोर्ट को जल्द लागू करना: कोर्ट के आदेशानुसार ओबीसी आयोग को 20 जून तक रिपोर्ट देनी है। ऐसे में सरकार का पूरा जोर होगा कि इस रिपोर्ट को आते ही तुरंत कैबिनेट से पास कराकर वार्डों का आरक्षण फाइनल किया जाए, ताकि जुलाई में मतदान सुचारू रूप से कराया जा सके।
विपक्ष हमलावर, प्रदेश में चुनावी सुगबुगाहट तेज
फैसले के बाद कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष भजनलाल सरकार पर हमलावर हो गया है। मूल याचिकाकर्ता गिरिराज सिंह देवंदा और अवमानना याचिका लगाने वाले कांग्रेस नेता संयम लोढ़ा का कहना है कि सरकार हार के डर से चुनाव टालना चाहती थी, जिससे स्थानीय विकास ठप था। बहरहाल, कोर्ट के इस आदेश ने प्रदेश में ठप पड़ी जमीनी राजनीति में अचानक जान फूंक दी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस कानूनी और राजनीतिक चुनौती से निपटने के लिए अपनी पोटली से कौन सा अगला कदम निकालते हैं।
