कॉकरोच जनता पार्टी रील की दुनिया से निकलकर शनिवार को रियल दुनिया में आई। जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने सैकड़ों युवा पहुंचे। कितने लोग और कौन लोग प्रदर्शन में आए इसे लेकर कांग्रेस समर्थक और आम आदमी समर्थक सोशल मीडिया पर आमने सामने हैं।

नई दिल्ली : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) रील की दुनिया से निकलकर शनिवार को रियल दुनिया में आई। जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने सैकड़ों युवा पहुंचे। कितने लोग और कौन लोग प्रदर्शन में आए इसे लेकर कांग्रेस समर्थक और आम आदमी समर्थक सोशल मीडिया पर आमने सामने हैं। कांग्रेस समर्थक जहां प्रदर्शन में आए युवाओं की ‘कम’ संख्या को लेकर सोशल मीडिया में मजाक बना रहे हैं और कह रहे हैं कि जो लोग पहुंचे हैं वो भी पुराने आप वाले हैं। वहीं आम आदमी पार्टी समर्थक पूछ रहे हैं कि कांग्रेस के लोग बीजेपी का साथ क्यों दे रहे
बीजेपी के नेशनल जनरल सेक्रेटरी (ऑर्गनाइजेशन) बीएल संतोष ने एक्स पोस्ट पर लिखा कि डिजिटल स्पेस में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के समर्थकों के बीच ऑलआउट वॉर चल रही है। ‘कॉकरोच’ हाशिए पर जाते दिख रहे हैं। आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल ने लिखा कि ‘कॉकरोच आंदोलन इस देश के युवाओं के भीतर मौजूद गहरे गुस्से और निराशा की अभिव्यक्ति है। उन्हें देशविरोधी कहने के बजाय मोदी सरकार को उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। आम आदमी पार्टी उनकी मांगों का समर्थन करती है। प्रधानमंत्री को शिक्षा मंत्री को तुरंत पद से हटाना चाहिए’।
कॉकरोच आंदोलन इस देश के युवाओं के भीतर मौजूद गहरे गुस्से और निराशा की अभिव्यक्ति है। उन्हें देशविरोधी कहने के बजाय मोदी सरकार को उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। आम आदमी पार्टी उनकी मांगों का समर्थन करती है। प्रधानमंत्री को शिक्षा मंत्री को तुरंत पद से हटाना चाहिए।
अरविंद केजरीवाल, आम आदमी पार्टी के नेता
किसे मिलेगा लाभ, इसे लेकर भी चिंता
दरअसल, ये एक बड़ा सवाल है कि युवाओं के असंतोष की इस नई डिजिटल लहर का राजनीतिक लाभ किसे मिलेगा और किसे नुकसान होगा। इसे लेकर भी अलग अलग राजनीतिक दलों के समर्थक एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। बीजेपी समर्थक जहां इस उभार को लेफ्ट की फिर से वापसी करने की कोशिश के तौर पर और एंटी नेशनल बता रहे हैं। वहीं कांग्रेस के कुछ समर्थक आम आदमी पार्टी से कॉकरोच पार्टी के लोगों के जुड़ाव की बातें कर इस प्रदर्शन का ही मजाक बना रहे हैं।
बीजेपी के लिए क्या
कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत पिछले महीने ही व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन के रूप में हुई। शनिवार को जंतर-मंतर पर इनका पहला प्रदर्शन था। प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएं, बेरोजगारी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग रहा। ये पहली नजर में सीधी चुनौती सत्ताधारी बीजेपी को दिखती है। रोजगार और युवाओं के भविष्य को लेकर सरकार पहले से ही विपक्ष के निशाने पर रहती है। लेकिन इन युवाओं का अलग प्लेटफॉर्म पर आना और विपक्ष के साथ जुड़कर उनकी ताकत न बढ़ाना, बीजेपी के लिए एक राहत की बात हो सकती है। हालांकि बीजेपी के नेता कॉकरोच पार्टी की शुरुआत होने के साथ ही इसे एंटी इंडिया गैंग कह चुके हैं।
किसे मिलेगा युवाओं का साथ
कांग्रेस लंबे वक्त से बेरोजगारी, परीक्षा घोटालों और युवा मुद्दों को उठाती रही है। लेकिन CJP के साथ जिस तरह युवा दिख रहे हैं इससे ये सवाल भी उठा है कि क्या युवाओं को पारंपरिक विपक्षी दलों पर भरोसा नहीं रह गया है। क्या युवा अब विपक्षी दलों की बजाय डिजिटल आंदोलनों के साथ खड़े होना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने कभी खुद को एंटी स्टैब्लिशमेंट और युवाओं की आवाज के तौर पर पेश किया था। CJP की भाषा, व्यंग्य, सोशल मीडिया आधारित संगठन और व्यवस्था विरोधी तेवर उसी स्पेस में जगह बना रहे हैं जहां कभी आम आदमी पार्टी का दबदबा था। इसलिए आप के लिए भी ये चुनौती है कि कहीं युवा असंतोष का नया चेहरा उसके बाहर न बन जाए। CJP अभी चुनावी दल नहीं है लेकिन डिजिटल स्पेस में तो यह युवा गुस्से का ब्रैंड बन चुका है। ऐसे में विपक्षी खेमे के भीतर यह खींचतान दिखेगी ही कि उसका फायदा किसे मिलता है।