
जब रोम जल रहा था तब नीरोंबी बजा रहा था। यह कहावत भारत की मौजूदा सत्ता जो दिल्ली की सत्ता है उस पर पूरी तरह साबित होती है। आज चारों तरफ देश के अंदर पेट्रोल को लेकर मची हुई है। पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइट देखी जा सकती है। लोगों को आसानी से डीजल पेट्रोल उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा घरेलू गैस की किल्लत ने भी पूरे देश को जग रख दिया है। वही हमारे देश के जो सत्ता है मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में यह बोल रहा हूं कि जो भारत की जो सत्ता है योनिया है वो देश की समस्याओं को नजरअंदाज करके आसाम में तमिलनाडु में केरला में चुनाव प्रचार में व्यस्त है भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृह मंत्री अमित पूरी मोदी सत्ता ने पश्चिम बंगाल में जाके जिला जा है उनको कैचरी करके ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल कर दिया है करना है और एनी हाउ एनी उनको सत्ता चाहिए। पश्चिम बंगाल में सत्ता चाहिए। असम में दोबारा से सत्ता को दोहराना चाहते हैं। तमिलनाडु केरला में भी उनको सत्ता चाहिए। लेकिन जहां जहां आज जो दिल्ली की सत्ता में जो पार्टी है भारतीय जनता पार्टी की जिन राज्यों में जो सरकारें हैं भारतीय जनता पार्टी की वहां आज लोग तिल दिल कर मर रहे हैं। लोगों का जीना हराम हो चुका है। वो राज्य बुरी तरह से अराजकता की आग में जल रहे हैं। इसके अलावा जो सबसे बड़ा आरोप जो मौजूदा सत्ता में लगा है वो भारतीय जनता पार्टी के जो एमपी है जो दिग्गज नेता है सुब्रमण्यम स्वामी वो कहते हैं अमित शाह गुड्डा है। यहां तक की वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हैं। उनके चरित्र पर आरोप लगाते हैं कि कई महीना बाद उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ निजी संबंध बनाकर सत्ता में अपनी भागीदारी करी। वहीं एक जो खास आरोप जो उस समय प्रधानमंत्री और मोदी ने सत्ता में लड़ा है। खुद जिन्होंने एक महिला बन किस्मत जिन्होंने मोदी नामक किताब लिखी। मोदी का गुणगान किया और पूरी दुनिया में मोदी की जय जयकार करी। वही परिस्थिति में जो मोदी नाम की लेखिका है वो आरोप लगाती है कि भारतीय जनता पार्टी दुनिया की सबसे गंदी पार्टी है। मैं विष्णु अग्रवाल आप सभी का स्वागत करता हूं। आप देख रहे हैं डेली इंडिया टाइम्स डिजिटल न्यूज़ चैनल। भारत का लोकतंत्र ही उसका सबसे बड़ा अंतर्द्वंद है। ये बात आज हम क्यों कर रहे हैं? यह बात आज इसलिए कर रहे हैं क्योंकि पूरे भारत देश की जो राजनीतिक व्यवस्था है, पूरे भारत देश की जो सामाजिक व्यवस्था है, पूरे भारत देश की जो पूरी लोकतांत्रिक प्रणाली है, पूरी तरह खंड खंड नजर आती है। कहीं भी नजर नहीं आता कि भारत देश एक सही दिशा में आगे जा रहा है या भारत देश व्यापक रूप से कोई बड़े परिणाम स्वरूप कोई बड़े फैसले कर रहा है। या भारत देश की जो वर्तमान सत्ता है जी हां जो सबसे प्रमुख बात है जो भारत देश की जो वर्तमान सत्ता है वो कई सवालों के घेरे में है। अनेक आलोचनाओं के घेरे में है। और ये आलोचनाएं कोई विपक्ष के नेता राहुल गांधी नहीं लगा रहे। अखिलेश यादव उन पर सत्ता पर आरोप नहीं लगा रहे। ममता बनर्जी कोई आरोप नहीं लगा रही या लालू यादव कोई आरोप नहीं लगा रहे। मौजूदा सत्ता पर जो आरोप लग रहे हैं वो आरोप लगा रहे हैं सुब्रमण्यम स्वामी जो खुद भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता हैं। भारतीय जनता पार्टी में सुब्रमण्यम स्वामी को एक बड़ा कद हासिल है। यह वही सुब्रमण्यम स्वामी है जिन्होंने राहुल गांधी और सोनिया गांधी को अदालत के कटघरे में ले जाके खड़ा कर दिया और तब भारतीय जनता पार्टी ने सुब्रमण्यम स्वामी को भीष्म पितामह और एक तगड़े एक शक्तिशाली राजनेता के रूप में एडवोकेट के रूप में पूरे भारत देश को सामने रखा। वही सुब्रमण्यम स्वामी आज आरोप लगा रहे हैं। बड़ा संगीन आरोप लगा रहे हैं। अमित शाह को गुंडा बोल रहे हैं। अभी हाल ही में शालिनी करके एक जर्नलिस्ट है। उनके साथ पोर्टकास्ट में सुब्रमण्यम स्वामी ने बोला कि अमित शाह तो गुंडा है। भारत के गृह मंत्री को गुंडा बोल रहे हैं भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता। बड़ी शर्मनाक तथ्य है ये शर्मनाक बात है। लेकिन इसके पीछे की जो कहानी है वो काफी गहरी है। वो कई आरोप लगाते हैं जो पास्ट में कुछ मर्डर हुए हैं। उनसे जोड़ा जाता है अमित शाह का नाम। तो सुब्रमण्य स्वामी ने खुलकर कहा है कि अभिषेक गुंडा है। बड़ा ही एक चैलेंजिंग सवाल खड़ा होता है कि आखिर आखिर मौजूदा सत्ता कैसे उनको झेल रही है? अगर अगर यह शब्द यूज़ में लेंगे अगर यहां पर सुब्रमण्यम स्वामी गलत है तो क्या वो उनकी जगह आज जेल की सलाखों के पीछे नहीं होनी चाहिए। यहीं नहीं रुकते सुब्रमण्यम स्वामी इससे और आगे निकल जाते हैं। जी हां, हमारा ये सेशन आज मैं आपके सामने सारी सारी जो सच्चाई है जो मौजूदा सत्ता को सवालों में लेके आती हैं उस पर कई मैं आपके सामने ज्वलंत मुद्दे रखने वाला हूं। दोस्तों सुब्रमण्य स्वामी अमित शाह को गुंडा कहते यहीं तक नहीं रुकते। इससे आगे जाके कहते हैं कि जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सत्ता में कई ऐसी महिला सांसद हैं। जी हां, नाम उन्होंने नहीं बताया लेकिन इशारा जैसे उन्होंने किया साफ नजर आता है कि वो महिला सांसद कौन हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि एक महिला सांसद जो कि जिन्होंने राहुल गांधी को हराया। अमेठी से चुनाव जीता। 12थ पास जिनकी एजुकेशन है। हारने के बाद भी उनको दिल्ली की सत्ता में कैबिनेट मिनिस्टर बनाया गया। एजुकेशन मिनिस्टर बनाया गया। मानव संसाधन मंत्रालय सौंपा गया। क्यों? सवाल उठता है क्यों? सुब्रमण्य स्वामी कहते हैं कि नरेंद्र मोदी पर वो उनके चरित्र तक पर सवाल खरीद करके कहते हैं कि पर्सनल तरीके से उपयोग करके उन महिलाओं को सत्ता में भागीदारी दी गई। कितना शर्मनाक तथ्य है ये दोस्तों। मतलब रूह कांप जाती। अगर यही आरोप राहुल गांधी ने लगाया होता तो आज जेल की सलाखों के पीछे होते या उनके घर में आग लगा दी जाती। उनका मकान छीन लिया जाता, एलओपी का पद छीन लिया जाता। अनेक सवाल, अनेक कानून की धाराएं राहुल गांधी को कटघरे में खड़ा कर देती। लेकिन मजाल नहीं है मौजूदा सत्ता में। कैसा डर है ये? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डर रहे हैं सुब्रमण्यम स्वामी से। अमित शाह जो गृह मंत्री हैं भारत के वो डरे हुए हैं सुब्रमण्यम स्वामी से। सुब्रमण्य स्वामी को क्यों झेल रही है भारतीय जनता पार्टी? कितने गंदे घिनौने निकृष्ट आरोपों को कैसे बर्दाश्त किया जा रहा है? अगर या फिर इनमें हकीकत है क्या ये हकीकत है कि अमित शाह गुंडा है जैसा सुब्रमण्यम स्वामी बोल रहे हैं या वो जो अमित शाह और जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चरित्र पर सवाल उठा रहे हैं कि कुछ महिला सांसदों का निजी उपयोग करके उनको मंत्रालय दिए गए। कितनी कितनी सवाल खड़े होते हैं दोस्तों। आखिर ये देश कहां जा रहा है? मैंने पहले ही कहा कि भारत का लोकतंत्र एक ऐसा अंतर्द्वंद है जिसमें जिसमें जिस इस अंतर्द्वंद का सवाल तो खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास नहीं है। गृह मंत्री अमित शाह के पास नहीं है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पास नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के जज के पास नहीं है। हिंदुस्तान की किसी भी हाई कोर्ट के जज के पास नहीं है कि भारत का जो लोकतंत्र है वो अंतर्दंद क्यों है? एलओपी राहुल गांधी के पास नहीं है। कौन देगा इस सवाल का जवाब कि देश कहां जा रहा है? लगता है भारत जैसे काले रास्ते में जा रहा है। दोस्तों 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने थे याद है पूरे देश को एक आशा की किरण जागी थी कि अब भारत में एक नया विकास का विकास जगमगाएगा। भारत में एक नया उदय होगा। लेकिन 2014 के बाद में नोटबंदी का वार हुआ और भारत की जो व्यवस्था है वो चरमरा गई। लोग भीख मांगने पर मजबूर हो गए। लोगों के घर उजड़ गए। कई लोगों की हत्याएं हो गई। कई लोगों ने आत्महत्याएं कर ली। लोग अभी नोटबंदी के घाव से उभर भी नहीं पाए थे कि जीएसटी ने देश को तहत्राह के दलदल में ले जा के धकेल दिया। कोरोना ने उसमें आग में घी डालने का काम वैक्सीन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जी हां, हम एक अब हम आपके सामने एक एक विशेष बात रखने वाले हैं। दोस्तों 2014 में जब प्रधानमंत्री बने थे नरेंद्र मोदी तो एक खास उनके साथ में लेखिका हुआ करती थी मधु किश्वर जिनको दुनिया जानती है क्योंकि मोदी नामक किताब लिखी थी और जय जयकार की गई थी उस किताब में जिसकी लेखिका है मधु किश्वर। मधु किश्वर अभी बोल रही है कि भारतीय जनता पार्टी दुनिया की सबसे गंदी पार्टी है। वो मधु किश्वर जिन्होंने मोदीनामा किताब लिखकर पूरी दुनिया में मोदी प्रधानमंत्री मोदी का झंडा बुलंद किया। वो आज ये बोल रही है कि भारतीय जनता पार्टी दुनिया की सबसे गंदी पार्टी है। भारतीय जनता पार्टी के नेता महिलाओं का शोषण करते हैं। उनके चरित्र की हत्या करते हैं। इसकी यही नहीं रुकती। मधु किशोर भी का सुब्रमण्यम स्वामी की तरह कई और आरोपों से आगे निकलते हुए कहती है कि जो वैक्सीन लगाई गई कोरोना के बाद में जो लोगों को वैक्सीन लगाई गई वो सिर्फ एक एक उसमें मानवता की हत्या की गई वैक्सीन के नाम पर लोगों को धोखा दिया गया झूठ बोला गया लूटा गया दोस्तों आखिर आखिर आखिर जो जो प्रोपेगेंडा है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकारों का 15 साल वो तीसरी बार की सत्ता के सेशन में चल रहे हैं प्रधानमंत्री। हालांकि जो कई बड़े भारत के नामीग्रामी एस्ट्रोलॉजर हैं सुशील सिंह जिनका नाम हम आपके सामने रख रहे हैं। देश में ब्रांडेड एस्ट्रोलॉजर हैं सुशील कुमार सिंह वो ये आरोप वो आरोप नहीं वो अपनी बात कह रहे हैं कि कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना ये कार्यकाल किसी कीमत पर पूरा नहीं कर सकेंगे। उनकी सरकार को मतलब उनके सामने कई राजनीतिक चैलेंज आएंगे और उनको काफी उन चैलेंजों में उलझ के रह जाएंगे और वो वो अपना कार्यकाल पूरा नहीं करेंगे। ज्योतिषीय जनगणना भी कई एस्ट्रोलॉजर देश के नामी गिरामी ये आरो ये अपनी बात रख रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए आगे का जो राजनीतिक सफर है वो काफी उलझन भरा है। असंभव नजर आता है। साफ शब्दों में कहे गृह गोचर की जो दशा महादशा है वो उनके खिलाफ है। दोस्तों सत्ता कभी परमानेंट नहीं होती। सत्ता तो सत्ता कभी रहती ही नहीं है। सत्ता तो परिवर्तित सत परिवर्तन जैसे सूर्य के बाद चंद्र देव दुनिया में आते हैं। चन्द्र देव के बाद सूर्य देव आते हैं। अंधेरा होता है। प्रकाश होता है। उसी तरह सत्ता का खेल है। सत्ता का भी अगर एक जगह सत्ता रुक जाती है तो वो वो लोगों के खिलाफ होती है। लोगों की हत्या करने का काम करती है। मौजूदा जो सत्ता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वो सवालों के घेरे में है। क्योंकि यह सवाल कोई राहुल गांधी ने क्रिएट नहीं किए। अब नरेंद्र मोदी सरकार के जो मंत्री है कि राहुल गांधी में दिमाग नहीं है। राहुल गांधी बच्चे हैं। देश उनको गंभीरता से नहीं लेता। जो किरण रिजू जी है वो आए दिन ढिंढोरा पीटते हैं। कभी पार्लियामेंट में कभी बाहर कभी इधर-उधर जाके कि राहुल गांधी को देश की जनता गंभीरता से नहीं लेती। अभी जो स्मृति ईरानी है जिनकी भारतीय जनता पार्टी में आज दो गवारी की इज्जत नहीं है। उनको बेदखल कर दिया गया है। सत्ता से सत्ता से दूर रखा गया है। पार्टी में उनकी दो गोली की इज्जत नहीं है। वो कह रही है कि राहुल गांधी को देश गंभीरता से नहीं लेता। अब उन मैडम को कौन बताएं कि आपके लिए तो दरवाजे बंद है। राहुल गांधी को देश गंभीरता से नहीं लेता। इस बात को सुनकर बड़ी जोर से हंसी आती है। अगर राहुल गांधी एक शब्द बोल दे दोस्तों तो भारत की जो मौजूदा सत्ता है जिसके बॉस है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके जिस्म में पूरी सरकार में आग लग जाती है। राहुल गांधी के एक शब्द को नहीं झेल सकती। ये वर्तमान सरकार। छोटे-छोटे बच्चे जो आलोचना कर देते हैं कभी सोशल मीडिया पर आकर Instagram पर, Facebook पर, YouTube पर उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो जाते हैं। अभी हाल ही में 141 साल के बच्चे के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो गया। क्योंकि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कुछ तीखे सवाल पूछ लिए जो कि समस्याओं से जुड़े हुए हैं। क्या इस देश के अंदर सवाल पूछना गुनाह है? पाप है, अपराध है। अभी ये सुनने में आ रहा है और ये प्रमाणिक बात है कि सोशल मीडिया पर आप सरकार की या सरकार से जुड़े किसी भी संगठन की आप आलोचना नहीं कर सकते। अगर आप करेंगे तो आपके अकाउंट को बैन कर दिया जाएगा, बंद कर दिया जाएगा, ब्लॉक कर दिया जाएगा। फिर ये सवाल खड़ा होता है कि इंडिया का भारत कहां जा रहा है? क्या भारत काले रास्ते पर जा रहा है? कौन जिम्मेदार है इस मौजूदा जो जो जो काला अंधेरा भारत में छाया हुआ है इसके लिए जिम्मेदार कौन है? इसके लिए जिम्मेदार है भारत के मतदाता। वो मतदाता जो आंख पर पट्टी बांधकर वोटिंग करते हैं। चुनाव आयोग की बात कर लीजिए। चुनाव आयोग तो खुद ही एक श्रापित चुनाव आयोग बन चुका है। कितने सबूत राहुल गांधी ने देश की जनता के सामने रखे। कितने सबूत अदालतों में रखे गए? कितने सबूत मीडिया के सामने रखे गए। लेकिन सभी ने धृतराष्ट्र की तरह अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली और उन सबूतों को दरकिनार कर दिया गया। मरे हुए लोगों के नाम पर वोटिंग की जाती है भारत में या जो जिंदा लोग हैं उनको मार दिया गया लेकिन वोटिंग जारी है। चुनाव आयोग बहुत शानदार काम कर रहा है। फर्जी लोगों को जो सुप्रीम कोर्ट के जो हाई कोर्ट के कई मजिस्ट्रेट हैं पश्चिम बंगाल में उनके उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। कई ऐसे सवाल है चुनाव आयोग पूरी तरह कटघरे में है। लेकिन दोस्तों सवाल उठता है कि नरेंद्र मोदी की जो सरकार है उसके फैसले किस आधार पर तय होते हैं? राहुल गांधी कई सालों से ये आरोप लगा रहे हैं कि मुकेश अंबानी और जो गौतम अडानी है वो राहुल जो नरेंद्र मोदी सरकार है उसके मेन रियल मुखिया है कि दो दो व्यवसाययों की दो बिजनेसमैन की सरकार है ये और वो बिजनेसमैन ही सारे बड़े फैसले करते हैं। नरेंद्र मोदी केवल एक स्टैंप लगाते हैं कि ये फैसला लागू कर दो। दोस्तों इस हमने जो अभी बात चालू करी तो हमने उसका एक टाइटल दिया कि जब रोम जल रहा था तब नीरव बंसी बजा रहा था और ये बात सच्चाई है। ये हमने क्यों बोला कि जब रोम जल रहा था तब नीरव बंसी बजा रहा था। भारत जल रहा है। बेरोजगारी की आग में जल रहा है। रोजगार की आग में जल रहा है। आर्थिक विषमताओं की आग में जल रहा है। गरीबी की आग में जल रहा है। देश में कहीं भी मेडिकल सुविधाएं नहीं है। देश में एजुकेशन के नाम पर लूटखसोट हो रखी है। सरकारी एजुकेशन सुविधाएं फेल है। क्राइम पूरे देश के अंदर विकराल रूप में है। आप खुलेआम भारत में किसी को गोली मार दीजिए। आपको गिरफ्तारी नहीं होगी और अगर हो भी गई तो कुछ दिनों बाद बेल हो जाएगी। खुलेआम रेप होते हैं भारत में। जब 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने थे भारत के प्रधानमंत्री को एक उम्मीद जागी थी कि ये रुकेगा जो मैं अभी आपके सामने बोल रहा हूं कि रेप नहीं होंगे, क्राइम नहीं होंगे, गोली नहीं मारी जाएगी। नन्ही-नन्ही बच्चियों के साथ रेप हो जाते हैं भारत में। शर्म क्यों नहीं आती भारत की सत्ता को? शर्म क्यों नहीं आती पुलिस को? क्यों नहीं आती? समाज को कौन जिम्मेदारी लेगा इनकी? सरकार पर तो सवाल उठेंगे ही उठेंगे। सरकार अपने अपने उठने वाले सवालों से पल्ला नहीं झाड़ सकती। बेशक टीवी न्यूज़ चैनलों की घूंघट की आड़ में छिपी है मौजूदा सरकार। भारत के टीवी चैनलों ने लोकतंत्र को कुचलने में पिछले 10 साल में जो कृत किए हैं ना वो उससे पहले इस तरह का घिनौना अपराध सामने नहीं आया। लगता है कि जो टीवी चैनल है जो उनके एंकर हैं जो उनके मालिक हैं उन्होंने अपने जिस्म को बेच दिया है। धन दौलत के आगे सत्ता के सरकार के पैरों में रख दिया है कि हम आपकी जय जयकार हमेशा करेंगे। कितने भी बलात्कार हो जाए भारत में पर हमारी जय जयकार में कभी नहीं आएगी। अभी अभी अमेरिका में और ईरान में युद्ध चल रहा है। उस युद्ध से भारत बुरी तरह प्रभावित है। आज की तारीख में देश में पेट्रोल डीजल की किल्लत है और सरकार और सरकार के मुखिया और सरकार के अनगिनत मंत्री और जो छुटप चवन्नी चोर नेता है वो भी ये दावा कर रहे हैं कि हमारे देश में कोई कमी नहीं है। लेकिन हकीकत क्या है? अगर कमी नहीं है तो पेट्रोल पंपों के बाहर ये लाइन क्यों लगी हुई है? क्यों आप लोगों का भरोसा नहीं जीत पा रहे हैं? क्यों लोग घरेलू गैस के जो सिलेंडर है वो ₹2000 की कीमत पर बिक रहे हैं? ₹ ₹2000 की कीमत पर घरेलू गैस के सिलेंडर की डिमांड हो चुकी है। क्यों? कैसे कह सकते हैं कि अब भारत के अंदर जो जो गैस की जो किल्लत है वो नहीं है। भारत में मौजूदा भंडार। अगर ये भंडार है तो वो आम जनता के लिए उपलब्ध क्यों नहीं है? सवालों से सरकार छिप तो सकती है। मीडिया का चोला पहन के उसके घूंघट के पीछे जा सकती है लेकिन भाग नहीं सकती। फर्जी चुनाव आयोग के बेस पर फर्जी वोटिंग करा के चुनाव भी जीत सकती है सरकारें। लेकिन सवाल तो फिर भी उठेंगे। क्योंकि सवाल उठना लाजमी है और जो सरकारें सवालों से डरती है, भागती है, मुंह छुपाती हैं, क्या वो सरकारें रह पाती है? क्या उनका अस्तित्व टिक पाता है? नहीं। बिल्कुल नहीं टिक पाता। थैंक यू वेरी मच।