Rajasthan Police: राजस्थान की प्रतापगढ़ पुलिस ने महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में एक साहसी अंतर-राज्यीय ऑपरेशन को अंजाम दिया। इस ऑपरेशन में एक सब-इंस्पेक्टर और दो कांस्टेबलों ने 53 राजस्थानी आदिवासी मजदूरों को बचाया, जिनमें 13 महिलाएं शामिल थीं, जिन्हें जिन्हें दूरदराज के गन्ने के खेतों में बंधक बनाकर बिना पैसे के काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा था।
EDITOR VISHNU AGARWAL/DAILY INDIATIMES DIGITAL JOURNALISM PLATFORM/DAILY JAIPUR TIMES NEWS NETWORK/RAJASTHAN POLICE NEWS
जयपुर/प्रतापगढ: यूं तो अपराधियों को पकड़ने का काम पुलिस के लिए रोज का है लेकिन कभी कभी ऐसे मौके आते हैं जब पुलिस की बहादुरी पर लोगों को गर्व होता है। उनके द्वारा किए गए काम से खाकी का मान बढ़ता है और समाज में पुलिस की एक अच्छी छवि बनती है। ऐसा ही बड़ा कारनामा किया है प्रतापगढ़ जिले की पुलिस ने। यंग एसपी की लीडरशिप में एक सब इंस्पेक्टर और दो जवानों ने ऐसा काम कर दिया जिसे कई बार बड़ी फोर्स को भी पसीने आ जाते हैं। पुलिस के तीन जांबाजों ने महाराष्ट्र में बंधक बनाए गए राजस्थान के 53 मजदूरों को मुक्त कराया है। इन मजदूरों में 13 महिलाएं भी शामिल है। प्रतापगढ एसपी का कहना है कि आबादी से दूर जंगल में बने गन्ने के खेतों में मजदूरों को बंधक बनाकर जबरन मजदूरी करवाई जाती थी। जब पुलिस टीम ने दबिश दी। तब एक जमींदार ने 17 मजदूरों को कमरे में बंद कर ताला लगा रखा था।
यंग टीम ने किया कमाल
राजस्थान से मजदूरों को महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के अलग अलग क्षेत्रों से 53 मजदूरों को मुक्त कराने वाली पूरी टीम यंग है। प्रतापगढ़ के एसपी बी. आदित्य, सब इंस्पेक्टर और दो पुलिस कांस्टेबलों ने पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया। एसपी बी. आदित्य ने घंटाली थाना प्रभारी सब इंस्पेक्टर सोहनलाल को महाराष्ट्र जाने का टास्क दिया। सोहनलाल के साथ दो पुलिस कांस्टेबल दिनेश चंद्र और गणेश लाल मीणा को भेजा गया। इन तीन जाबांजों की जोड़ी ने सिर्फ दो दिन में पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया। अलग अलग जमींदारों के खेतों में बंधक बनाकर मजदूरी करने वाले मजदूरों को मुक्त कराया। इस ऑपरेशन के दौरान एडिशनल एसपी गजेंद्र सिंह जोधा पुलिस टीम का मार्गदर्शन करते रहे।
आईपीएस बी. आदित्य को पहली बार मिली SP की जिम्मेदारी
प्रतापगढ़ जिले के एसपी बी. आदित्य वर्ष 2021 बैच के आईपीएस हैं। वे तेलंगाना के रहने वाले हैं। ट्रेनिंग के बाद उन्होंने कुछ समय के लिए गंगानगर जिले में सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में काम किया। जुलाई 2025 में ही राज्य सरकार ने बी. आदित्य को प्रतापगढ एसपी की जिम्मेदारी दी। एसपी के रूप में उनका यह पहली पोस्टिंग है और इसी दरमियान उनके कुशल नेतृत्व में प्रतापगढ पुलिस ने बड़ी उपलब्धि हासिल की।
तीन जाबांजों में 1 एसआई और 2 कांस्टेबल
बंधक बनाए गए आदिवासी समुदाय के मजदूरों से पिछले दो महीने से जबरन मजदूरी करवाई जाती थी। उन्हें मजदूरी की एवज में भुगतान भी नहीं किया जा रहा था। एसपी बी. आदित्य के निर्देशन और एडिशनल एसपी गजेंद्र सिंह जोधा के मार्गदर्शन में एक सब इंस्पेक्टर और दो पुलिस कांस्टेबलों ने कमाल कर दिया। ऑपरेशन के दौरान दो तीन स्थानीय मजदूरों को साथ ले जाया गया जो जमींदारों के चंगुल से छूटने में कामयाब रहे थे। उनके सहयोग के चलते ऑपरेशन तत्काल पूरा हो गया।
जानिए कौन हैं ये तीनों जांबाज
सब इंस्पेक्टर सोहनलाल घंटोली थाने के एसएचओ हैं। सोहन लाल बांसवाड़ा जिले के बागीदौरा तहसील के नई पाटन गांव के रहने वाले हैं। वे वर्ष 1996 में सिपाही के रूप में पुलिस में भर्ती हुए थे। तीन प्रमोशन पाकर वर्ष 2020 में वे सब इंस्पेक्टर बन गए। सोहनलाल पिछले साढे तीन साल से घंटोली थाने में तैनात है। उनकी टीम में शामिल पुलिस कांस्टेबल दिनेश चंद्र और गणेश लाल शामिल रहे। पुलिस कांस्टेबल दिनेश चंद्र भी बांसवाड़ा जिले के रहने वाले हैं। उनका गांव घोड़ी तेजपुर, छोटी सरवान तहसील में है। दिनेश चंद्र वर्ष 2017 को पुलिस में भर्ती हुए थे। पुलिस कांस्टेबल गणेश लाल प्रतापगढ़ जिले के दलोट तहसील के राणा का खेड़ा गांव के रहने वाले हैं। वे वर्ष 2013 में पुलिस सेवा में भर्ती हुए थे।
