राजस्थान विधानसभा में पास हुआ ‘राजस्थान मृत शरीर का सम्मान विधेयक 2023’, जिसके बाद से अब शव रखकर धरना प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ मुकदमे दर्ज होंगे। इसमें 2 साल तक की सजा का प्रावधान है। अगर कोई नेता इसमें शामिल होता है तो उन्हें 5 साल की सजा होगी।
VISHNU AGARWAL/JOURNALIST/DAILY INDIATIMES/DAILY JAIPUR TIMES
जयपुर: राजस्थान में आए दिन शव के साथ होने वाले धरना प्रदर्शन पर रोक लगाने के लिए गहलोत सरकार कानून बनाने जा रही है। इस संबंध में राजस्थान विधानसभा में ‘राजस्थान मृत शरीर का सम्मान विधेयक 2023’ पास किया गया। यह कानून अस्तित्व में आने के बाद शव रखकर धरना प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ मुकदमे दर्ज होंगे। इसमें 2 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। इस विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि शव के साथ हो रहे धरना प्रदर्शन में अगर कोई नेता शामिल हुए तो उन्हें 5 साल की सजा होगी। अगर किसी मृतक के परिजन विदेश में हैं तो ऐसे मामलों में जिला प्रशासन को लिखित सूचना देने पर शव रखने की इजाजत मिलेगी।
15 में से 14 सदस्य बिल के विरोध में बोले
नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र ने कहा कि मृतक के परिजन कतई नहीं चाहते कि वे शव को लेकर प्रदर्शन करें, लेकिन सरकार और प्रशासन की लापरवाही की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए शव को लेकर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं। कई बार सरकार और प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने के लिए परिजनों पर दबाव डालती है। इसके विरोध में परिजन या ग्रामीण शव रखकर प्रदर्शन करते हैं। ऐसे मामलों में अगर पुलिस जबरन अंतिम संस्कार करेगी तो पीड़ितों को न्याय कैसे मिलेगा।
राठौड़ ने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए नेतागण धरने में शामिल होते हैं और परिजनों को आर्थिक मुआवजा दिलाने के लिए सरकार को मजबूर करते हैं। यह कानून बनाकर सरकार पीड़ित परिवारों की आवाज कुचलना चाहती है।
सरकार का अंतिम संस्कार करेगा यह विधेयक: बीजेपी
बीजेपी नेता राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि जबरन अंतिम संस्कार करने का यह विधेयक सरकार का अंतिम संस्कार कर देगा। इस बिल से लोगों में भय पैदा होगा। कोई किसी की मदद के लिए आगे नहीं आएगा। राठौड़ ने कहा कि जोधपुर के ओसियां में एक ही परिवार के चार सदस्यों की हत्या हो गई। परिजनों और ग्रामीणों के साथ कांग्रेस विधायक दिव्या मदेरणा भी धरने पर बैठी है। क्या सरकार दिव्या मदेरणा को जेल भेजना चाहती है।
आदिवासी नेता बोले- क्या मौताणे पर अब जेल में डालोगे
इस बिल का विरोध करते हुए आदिवासी क्षेत्रों के विधायकों ने कहा कि आदिवासी इलाकों में मौताणा की प्रथा सदियों से चली आ रही है। मृतक परिवार को मुआवजा देने के लिए समाज के लोग सर्वसम्मति से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिलवाते हैं। यह प्रथा आदिवासियों में सर्वमान्य है। अब शव रखकर प्रदर्शन करने पर जेल में डालेंगे तो आदिवासियों में टकराव बढ़ेगा। लोगों में बदले की भावना होगी और अपराध के विरोध में अपराध बढ़ेंगे।
इन विधायकों ने किया विधेयक का विरो
राजस्थान मृत शरीर का सम्मान विधेयक 2023 को सदन में पेश किए जाने के बाद 14 विधायकों ने इसका विरोध किया। इनमें नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, भाजपा विधायक बिहारीलाल बिश्नोई, दीप्ति किरण माहेश्वरी, बाबूलाल खराड़ी, प्रतापलाल भील, निर्दलीय विधायक संयम लोढा, माकपा विधायक बलवान पूनिया, विट्ठल शंकर अवस्थी, जगदीश चंद्र, जोराराम कुमावत, रामप्रताप कासनिया शामिल रहे।
शांति धारीवाल बोले- वसुंधरा राजे भी बनाना चाहती थीं ये कानून
विपक्ष के सदस्यों ने इस बिल का विरोध किया। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि ऐसा कानून तो आपकी पूर्व मुख्यमंत्री भी बनाना चाहती थीं। नवम्बर 2016 में जिला कलेक्टर्स के साथ बैठकें भी हुई थीं, लेकिन आप लोग ये बिल तैयार नहीं कर सके। धारीवाल ने कहा कि पूर्व में बीजेपी शासन के दौरान 30 बार और कांग्रेस शासन के दौरान 306 बार शव रखकर विरोध प्रदर्शन किए गए। ऐसी स्थितियों पर अंकुश लगाने के लिए यह विधेयक पेश किया गया है।
