चांदी बढ़ने की उम्मीद थी लेकिन कभी इतना बढ़ेगी एक साथ ऐसी उम्मीद कभी नहीं थी। चांदी की जो प्राइसेस है पहले हमेशा एक तोले सोने से 1 किलो चांदी की प्राइस ऑलमोस्ट डबल होती थी। लेकिन कुछ छ एक महीने पहले धीरे-धीरे घटती घटती चांदी की प्राइसे संकुचित 100 करके सोने के बराबर आ गई थी। एक रात तो ऐसा हुआ था कि चांदी की प्राइस सोने से ₹000 कम हो गई। उस दिन के बाद से चांदी एकदम बढ़ती चली गई और अपनी जैसे कि सामान्य अवस्था है कि सोने से तकरीबन डबल का जो रेशो है उससे थोड़ी सी आगे निकल रही थी। लेकिन वापस से यह पीछे आ गई। अभी इस सोशल मीडिया के दौर में चांदी के उपयोग और उपलब्धता दोनों के बारे में इतना विस्तार से बता दिया कि लोगों को ऐसा लगा कि चांदी सीधे 7 लाख के ऊपर चली जाएगी। लेकिन जब भी कोई चीज एक साथ भागती है, प्राइिस बढ़ती है तो उसमें करेक्शन आता है। और ये करेक्शन आना सामान्य बात है। इस तरह के उतार-चढ़ाव में ज्वेलर्स को हमेशा घाटा होता है। कभी भी नफा नहीं हो सकता। क्योंकि आज जो ने 50 ग्राम कोई सामान बेच दिया इस भाव में और घंटे भर बाद में वो बढ़ जाती है रेट उसकी तो वो 50 ग्राम इतने से समय में खरीदने नहीं जाएगा ना और जब खरीदने जाएगा तब तक उसके पैसे कम पड़ जाएंगे तो उसको घाटा है जब घटने लगती है चीजें तब उसके टोटल स्टॉक के अंदर उसको कमी नजर आती है तो वो भी उसको एक तकलीफ है कि महंगे दाम के ऊपर उसने मेटल खरीद लिया पैसे दे के और अब दाम हम सस्ते हो गए तो ऐसे भी ज्वेलर को घाटा है। तो इस तरह के जो ज्यादा उराव होते हैं उसमें कभी भी ज्वेलर्स प्रॉफिट में नहीं रहते। हमेशा तकलीफ में रहते हैं। इसमें षड्यंत्र नहीं है। कोई भी चीज अगर लिमिट से ज्यादा भागती है तो उसमें करेक्शन मैंने आपको पहले भी अर्ज किया था। करेक्शन आता है। ये करेक्शन सामान्य से कुछ ज्यादा आया है इस बार। लेकिन कहीं उससे ज्यादा बड़ा भी था। अगर 1 लाख से सीधी 4 लाख चाली आई तो अभी तो ढाई लाख ही आई है। पहले सारी इलेक्ट्रिक चीजों में बैटरीियों में सब में काम आ रही थी। सात दिन पहले तक सब में काम आ रहे थे और सात दिन बाद में सब में लगना बंद हो गया क्या? जी निश्चित तौर के ऊपर चांदी की जो दाम बढ़ने की संभावना है वो काफी है। उसका रीज़न है कि इसके यूजेज काफी हो गए और ऑल अराउंड द वर्ल्ड इसका प्रोडक्शन कम है पहले से और यूज़ ज्यादा हो गए। तो आने वाले समय के अंदर एक चाइना ने अपने एक्सपोर्ट का जो गेन लगाया वो भी इसका एक प्रमुख कारण था कि चाइना सेकंड लार्जेस्ट प्रोड्यूसर ऑफ सिल्वर उसने यदि चांदी अपने रोक दी है तो विश्व बाजार में चांदी की थोड़ी कमी देखी जाती थी लोगों से कि भाई कमी आने वाली है।
उसके रहते हुए एक आम जनता के अंदर में भी चांदी के प्रति सम्मोह बढ़ गया था। देखिए इन ढील से चांदी के बाजार में मेरे हिसाब से तो कोई सरकार नहीं आना चाहिए। चांदी तो एक्चुअली अपने वास्तविक उपयोग के कारण धीरे-धीरे लेकिन धीरे-धीरे बढ़नी चाहिए थी। एकदम जो बढ़ी है उससे लोगों के अंदर बेचैनी ज्यादा थी। यही अगर साल भर डेढ़ साल के दौरान बढ़ती तो शायद लोग इतने परेशान नहीं होते। मैं सिर्फ यह कहना चाहता हूं कि जब मैंने चांदी का व्यापार शुरू किया था तो चांदी मात्र ₹6000 किलो होती थी। आज 6000 से आज भी 400 गुना बढ़ी हुई है। 40 गुना बढ़ी हुई है यह चांदी। तो जब इतना गुना बढ़ गई तो और दुगना बढ़ जाएगा तो क्या पता जाएगी तो और मेटल के दाम तो धीरे-धीरे हमेशा बढ़ते ही रहेंगे। इसमें कोई रोकने वाला नहीं है। तो चाबी का प्रोडक्शन वर्ल्ड वाइज कम हो रहा है। तो आदमी को घबराने की जरूरत नहीं है। जब पिछली बार भी पिछली बार से कई गुना मेहनत जो आप खरीद रहे हैं तो अभी तो कुछ परसेंटेज में बढ़ने वाली है। कोई टेंशन नहीं है। देखिए इतनी तेज गति से बढ़ना तो सभी के लिए नुकसानदायक है। धीरे-धीरे तो हमेशा मेटल के दाम बढ़ते जाए और ये रेगुलर बढ़ते हैं। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है। देखिए मैं कोई इन्वेस्टमेंट का एक्सपर्ट नहीं हूं। तो मैं लोगों को सलाह दूं कि भाई इसमें आप इन्वेस्ट कर दें या नहीं करें। लेकिन ऐसा मेरा मानना है कि मेटल के दाम धीरे-धीरे बढ़ेंगे ही घटेंगे नहीं। और इसीलिए लोग ज्वेलरी के फॉर्म में मेटल को रखते हैं कि वो हमेशा एक सिक्योर इन्वेस्टमेंट माना जाता है। और आगे भी मैं ऐसी कल्पना ही नहीं। मैं पूर्ण विश्वास है कि जो भी लोग आज चांदी की या सोने की ज्वेलरी खरीद रहे हैं उनके दाम कम होने वाले नहीं है। वो उनका फ्यूचर के अंदर सेफ इन्वेस्टमेंट रहेगा। सर एक निश्चित तौर के ऊपर ज्वेलर्स ही नहीं जयपुर के अंदर दो तीन बड़े मार्केट है। ज्वेलरी का मार्केट है, कपड़े का मार्केट है, कारपेट का मार्केट है। हैंडीक्राफ्ट का भी मार्केट है। सभी को इससे लकड़ी का भी मार्केट है। सभी को इससे फायदा होने वाला है और निश्चित तौर के ऊपर फायदा होने वाला है। इससे एक बड़ी बात ये है कि हमको जो यूरोप से जो ट्रेड डील हो गई है। अब दोनों अह जो बिजनेस में बढ़ोतरी होगी वह दिन दुगनी रात चौग मेरे हिसाब से होने वाली है।
POOJA SHARMA JOURNALIST
आपने 10 साल पहले कहां निवेश किया था? क्या आप भी उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने चांदी की रफ़्तार को कम आंका था? अपनी कहानी कमेंट में साझा करें!
Gold v/s Silver Returns In 10 Years: निवेश की बात आते ही भारतीय परिवारों में सबसे पहला नाम ‘सोने’ (Gold) का आता है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि पिछले 10 सालों में चुपचाप किस धातु ने निवेशकों की किस्मत बदल दी? आज जब चांदी ₹4 लाख प्रति किलो की तरफ दौड़ रही है, तब लोग हिसाब लगा रहे हैं कि काश! 10 साल पहले चांदी में दांव लगाया होता। आइए देखते हैं सोने और चांदी की उस जंग का नतीजा, जिसने पिछले एक दशक में अमीरी की परिभाषा बदल दी
10 साल का ‘महा-मुकाबला’: Gold vs Silver
जयपुर के ज्वेलर भीमसेन जैन ने बताया कि एक दशक में निवेश के नजरिए से कीमती धातुओं के बीच हुई जंग में चांदी ने सोने को बड़े अंतर से पछाड़ दिया है। यदि आपने साल 2016 में ₹1,00,000 का निवेश किया होता, तो आज 2026 में सोने में आपका पैसा बढ़कर करीब ₹3,00,000 (~200% रिटर्न) होता। वहीं, चांदी में यही निवेश आज ₹8,50,000 से ₹9,50,000 (~700% से ज्यादा रिटर्न) तक पहुँच चुका है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों और सोलर एनर्जी सेक्टर में चांदी की बढ़ती औद्योगिक मांग ने इसे सोने के मुकाबले कहीं अधिक कीमती और मुनाफे वाला निवेश बना दिया है। आमतौर पर सोने को सुरक्षित माना जाता है, लेकिन रिटर्न के मामले में चांदी ‘छुपा रुस्तम’ निकली।
एक्सपर्ट की राय: क्या अभी भी मौका है ?
जयपुर में तीन पीढ़ी से सोने-चांदी का कारोबार कर रहे ज्वेलर लेखराज सोनी ने बताया कि चांदी अभी और ऊपर जा सकती है । इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि दुनिया भर में बन रहे सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक कारों में चांदी का कोई विकल्प नहीं है। जयपुर के सर्राफा विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी आने वाले समय में “डिजिटल गोल्ड” से भी तेज रिटर्न दे सकती है। हांलाकि ये भी सत्य है कि सोने-चांदी समेत अन्य कीमती धातुओं पर शेयर बाजार का पूरा असर रहता है।
आम आदमी क्या करें?
बुलियान कारोबारी अश्विनी तिवारी ने बताया कि अगर इन्वेस्टर भारी भरकम चांदी नहीं खरीद सकते, तो बाजार में अब Silver ETF और Digital Silver के विकल्प भी मौजूद हैं, जहां आप ₹500 से भी निवेश शुरू कर सकते हैं। हालांकि निवेश करने से पहले एक्सपर्ट की राय जरूरी सुननी चाहिए और बाजार के हाव-भाव पर नजर जरूर रखनी चाहिए, नहीं तो परिणाम नेगेटिव भी आ सकते हैं
