Sunday, April 5
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ओज़ेम्पिक तेज़ी से वज़न घटाने के लिए मशहूर है. भारत में इसका इंजेक्शन तीन डोज़ में मिलेगा. 0.25Mg, 0.5Mg और 1Mg. सबसे कम डोज़ यानी 0.25Mg की कीमत 2,200 रुपये के करीब है.

दुनियाभर में मशहूर डायबिटीज़ और वज़न घटाने की दवा ओज़ेम्पिक अब भारत में लॉन्च हो गई है. 12 दिसंबर से ये देश में मिलने लगी है. इसे डेनमार्क की दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने बनाया है. ये वही दवा है, जिसके इस्तेमाल से दुनियाभर के सेलेब्रिटीज़ ने वेट लॉस किया है और कबूला भी है. जैसे टेस्ला और X के मालिक एलन मस्क. ओपरा विनफ्रे. टेनिस स्टार सेरेना विलियम्स. एक्ट्रेस एमी शुमर वगैरा-वगैरा. भारत में भी कई सेलेब्रिटीज़ ने ओज़ेम्पिक से वज़न घटाया है, बस कोई कबूलता नहीं है.

ओज़ेम्पिक डायबिटीज़ की दवा है, लेकिन ये ओबेसिटी यानी मोटापा घटाने में भी बहुत मददगार है.  करीब 3 महीने पहले, 26 सितंबर 2025 को CDSCO ने ओज़ेम्पिक को भारत में बेचने की मंज़ूरी दी थी. CDSCO यानी Central Drugs Standard Control Organisation. ये भारत में दवाओं को जांचने और मंज़ूरी देने वाली संस्था है. 

कंपनी भारत में ओज़ेम्पिक लॉन्च करने को तैयार है. इससे देश में टाइप-2 डायबिटीज़ के मरीज़ों को फायदा पहुंचेगा.

ओज़ेम्पिक को अभी डायबिटीज़ की दवा के तौर पर ही मंज़ूरी मिली है. वज़न घटाने की दवा के तौर पर नहीं. ओज़ेम्पिक को पेन फॉर्मेट में बेचा जाएगा. जैसे पेन में पहले से ही रिफिल पड़ी होती है. बिल्कुल वैसे ही इसमें भी दवा पहले से भरी हुई मिलेगी.

एक वीकली इंजेक्शन है. यानी हर हफ़्ते एक इंजेक्शन लगना है. कब तक लगना है और कितने डोज़ का लगना है, ये डॉक्टर ही तय करते हैं. बिना जांच और डॉक्टर की सलाह के, ये इंजेक्शन पेशेंट को नहीं दिया जा सकता.

ओज़ेम्पिक का इंजेक्शन तीन डोज़ में मिलेगा. 0.25Mg, 0.5Mg और 1Mg. सबसे कम डोज़ यानी 0.25Mg की कीमत 2,200 रुपये के करीब है. 0.5Mg की कीमत करीब 2,542 रुपये है. और 1Mg की कीमत 2,794 रुपये है.

रॉयटर्स से बातचीत में नॉर्डिस्क इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर विक्रांत श्रोत्रिया कहते हैं, डायबिटीज़ के मरीज़ों का ओज़ेम्पिक से 8 किलो तक वेट लॉस हुआ है. यानी इस दवा के फायदे सिर्फ शुगर कंट्रोल करने तक सीमित नहीं हैं.

ओज़ेम्पिक काम कैसे करती है? ये डायबिटीज़ के साथ-साथ ओबेसिटी कंट्रोल करने में इतनी असरदार कैसे है? ये हमने पूछा सी.के. बिड़ला हॉस्पिटल, गुरुग्राम में इंटरनल मेडिसिन के एसोसिएट डायरेक्टर

डॉक्टर तुषार तायल से.

डॉक्टर तुषार बताते हैं कि ओज़ेम्पिक ब्रांड नेम है. असल दवा सेमाग्लूटाइड है. ये GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट दवाओं के ग्रुप में आती है. GLP-1 यानी ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1. ये एक इनक्रेटिन हॉर्मोन है, यानी ये खाने के बाद खून में शुगर लेवल कंट्रोल करने में मदद करता है. GLP-1 हमारे शरीर में नैचुरली भी बनता है. लेकिन, ये खाना खाने के बाद कुछ ही मिनटों तक काम करता है. ज़्यादा से ज़्यादा आधा घंटा. मगर जब GLP-1 जैसी दवाएं बनाई जाती हैं, जिन्हें GLP-1 एनालॉग्स या GLP-1रिसेप्टर एगोनिस्ट कहते हैं, तो ये लगातार असर करती है. जैसे ओज़ेम्पिक. ये GLP-1 हॉर्मोन की नकल  उतारती है. इससे शरीर को लगता है, जैसे असली GLP-1 हॉर्मोन रिलीज़ हो रहा है.

ऐसा करके ये दवाएं डायबिटीज़ के मरीज़ों में दिनभर ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रखती हैं. खासकर खाने के बाद. वहीं जो मोटापे से परेशान हैं. उनमें ये दिमाग को सिग्नल भेजती है कि अभी भूख नहीं लग रही. इससे व्यक्ति अपने खाने पर कंट्रोल रखता है. ज़्यादा नहीं खाता. नतीजा? वज़न कम करने में मदद मिलती है.लेकिन इसे आप बिना पर्चे के नहीं खरीद सकते. ओज़ेम्पिक को सिर्फ डॉक्टर की सलाह से ही लिया जा सकता है. और सिर्फ ओज़ेम्पिक का इंजेक्शन लेने से काम नहीं चलेगा. साथ में एक्सरसाइज़ भी करनी पड़ेगी और डाइट भी सुधारनी होगी.सभी GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट्स दवाओं के इस्तेमाल को लेकर, WHO यानी वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने कुछ गाइडलाइंस जारी की हैं. इन्हें 1 दिसंबर 2025 को इशू किया गया है. क्या लिखा हैं इन गाइडलाइंस में, ये जानने के आप ये स्टोरी पढ़ सकते हैं. 

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