Sunday, April 5
Spread the love

रणवीर सिंह की ‘धुरंधर पार्ट 2’ को रिलीज हुए 7 दिन हो गए हैं। दुनियाभर में जहां यह 1006 करोड़ कमा चुकी है, वहीं सोशल मीडिया पर इसे ‘प्रोपेगेंडा फिल्‍म’ और ना जाने क्‍या-क्‍या कहा जा रहा है। पर क्‍या वाकई ऐसा है? आप बाकी बातें छोड़‍िए, बस फिल्‍म और असल जिंदगी की घटनाओं की क्रोनोलॉजी समझ‍िए।

DAILY MUMBAI TIMES/DAILY INDIATIMES/NEWS NETWORK

‘ये नया हिंदुस्‍तान है, ये घर में घुसेगा भी और घुसकर मारेगा भी।’ आदित्‍य धर की फिल्‍म ‘उरी: द सर्जिकल स्‍ट्राइक’ का यह डायलॉग तो आपको याद होगा ही। अब इसी ‘नए हिंदुस्‍तान’ की फिल्‍म है ‘धुरंधर पार्ट 1’ और ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’, जिसके पहले भाग में रणवीर सिंह का किरदार जसकीरत से हमज़ा अली मजारी बनकर हमारे नापाक पड़ोसी पाक‍िस्‍तान में घुसता है, और फिर सीक्‍वल में ‘घुसकर मारता’ है, वो भी चुन-चुनकर। अब बात नए हिंदुस्‍तान की हो रही है, तो देश के उन लोगों की भी बात करनी पड़ेगी, जो ना जाने क्‍यों इस फिल्‍म को लेकर शोर मचा रहे हैं। कह रहे हैं कि ये ‘प्रोपेगेंडा फिल्‍म’ है। उन्‍हें फिल्‍म में अतीक अहमद से प्रेरित आत‍िफ अहमद के किरदार पर आपत्त‍ि है। इन लोगों को फिल्‍म में दिखाए नोटबंदी के ‘बेहद असल’ कारण, ऑपरेशन ग्रीन लीफ पर भी हर्ज है। यहां तक तो चल भी जाता, ये लोग ऐसे हैं जो ‘असल घटनाओं से प्रेरित’ इस ऐतिहासिक भारतीय फिल्‍म में, देश के सीक्रेट एजेंट जसकीरत उर्फ हमज़ा को लेकर भी दावा कर रहे हैं कि उसने जो किया वह कांग्रेस सरकार की कोश‍िशों का नतीजा है, ना कि 2014 में नए भारत की इबारत लिखने आई बीजेपी सरकार का। अब हम भी कहां इस बहस में उलझ रहे हैं, आइए सीधे-सीधे क्रोनोलॉजी समझते हैं। जान ही लेते हैं कि आख‍िर सच क्‍या है और असल में कब क्‍या हुआ था।

उम्‍मीद है, आपने ‘धुरंधर 2’ देख ली होगी। अब इससे पहले कि हम आगे बढ़ें, 7 दिन में वर्ल्‍डवाइड ₹1006.50 करोड़ कमाने वाली आदित्‍य धर की सीक्‍वल फिल्‍म का वह सीन भी याद कर लेते हैं। कौन सा सीन? अरे वही, जहां वह बार-बार यह ‘कटु सत्‍य’ दिखाते हैं कि कैसे दाऊद इब्राहिम से लेकर नेता नबील गबोल से प्रेरित जमील जमाली का किरदार, यह कई बार कहता है कि ‘चाय वाले के आ जाने’ से उनकी हवा टाईट हो गई है।

फिल्‍म में क्‍या दिखाया गया-

शुरू से शुरू करते हैं। सबसे पहले बात जसकीरत के हमज़ा बनने की। फिल्‍म में हम देखते हैं आईबी अजय सान्‍याल के इशारे पर साल 2002 में जसकीरत को जेल ट्रांसफर के दौरान अगवा किया जाता है। फिर सान्‍याल के शार्गिद असफर सुशांत बंसल उसे ट्रेनिंग देते हैं। अजय सान्‍याल पंजाब के जसकीरत को ‘हौसला, ईंधन और बदला’ लेने के लिए मकसद देते हैं। इसके बाद 2004 में उसे सीक्रेट मिशन पर ल्‍यारी भेजा जाता है। यह सब साल 1999 में कंधार हाईजैक और 2001 में संसद हमले के बाद होता है।

क्‍या कहती है क्रोनोलॉजी

अब कालक्रम तो यही कहता है कि 1999 और 2001 में जब कंधार हाईजैक और संसद हमला हुआ, तब केंद्र में NDA की सरकार थी। अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे। साल 2002 में जब सीक्रेट एजेंट की भर्ती हुई, तब देश में वाजपेयी जी की सरकार थी। लेकिन 2004 में जब हमारा सीक्रेट एजेंट पाक‍िस्‍तान जाता है, तब उसी साल सत्ता परिवर्तन हुआ था। 22 मई 2004 को मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने थे। यह कांग्रेस नीत UPA की सरकार थी। यानी फिल्‍म की टाइमलाइन और असल जिंदगी की टाइमलाइन के हिसाब से आगे 10 साल 26 मई 2014 तक जो भी हुआ, वह मनमोहन सरकार के कार्यकाल में हुआ।

रहमान डकैत की मौत: फिल्‍म में-

धुरंधर पार्ट 1′ में हमने देखा कि कैसे हमज़ा अली मजारी ने पाक‍िस्‍तान के ल्‍यारी में सबसे पहले बलोच गैंगस्‍टर रहमान डकैत के गैंग में घुसपैठ की। फिर 2009 में फिल्‍म के आख‍िरी सीन में SP असलम के साथ मिलकर उसकी हत्‍या कर दी।

फिल्‍म की यह टाइमलाइन भी असल जिंदगी से मेल खाती है। रहमान डकैत की मौत 9 अगस्त 2009 को हुई थी। रहमान और उसके साथियों – अकील बलूच, औरंगजेब बाबा और नजीर बाला – को SP चौधरी असलम खान और उसकी पुलिस टीम ने रास्‍ते में रोक लिया। देर रात दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी हुई, जिसमें रहमान और उसके साथी गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

SP चौधरी असलम की मौत: फिल्‍म में

फिल्‍म में दिखाया गया है कि SP चौधरी असलम की मौत 2014 में होती है। हमज़ा इसके लिए प्‍लानिंग करता है। यह भी कि ये सब भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के आने के बाद होता है।

असल

यह 100 टका सच है कि SP चौधरी असलम की मौत 2014 में ही हुई थी। हालांकि, तारीख का फर्क है। चौधरी असलम की मौत 9 जनवरी 2014 को हुई। जबकि भारत में नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। खैर, कराची के ईसा नगरी इलाके में ल्‍यारी एक्सप्रेसवे पर असलम के काफिले से बारूद से लदी एक कार टकरा गई, जिससे असलम के साथ-साथ दो अन्य अधिकारियों, उनके गार्ड और ड्राइवर की भी मौत हो गई। यही चीज फिल्‍म में भी दिखाई गई है। असलम इससे पहले भी ऐसे 9 जानलेवा हमलों से बच चुके थे। असल की हत्‍या की तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) की मोहमंद एजेंसी शाखा ने जिम्मेदारी ली थी।

मेजर इकबाल की मौत: फिल्‍म में

धुरंधर 2′ में असली विलेन बनकर उभरता है मेजर इकबाल। यह असल जिंदगी में इलियास कश्मीरी के किरदार से प्रेरित है। वही इलियास, जो पाकिस्तानी स्पेशल फोर्सेज का ऑपरेटर था और बाद में एक इस्लामी जिहादी आतंकवादी नेता बन गया। फिल्‍म के आख‍िर में हमें हमज़ा अली मजारी का भयावह रूप दिखता है, जब वह देश के इस सबसे बड़े और खूंखार को मौत के घाट उतारता है। यह सब 2014 में भारत में मोदी सरकार के आने के बाद होता है।

इलियास कश्मीरी, भारत के जम्‍मू-कश्‍मीर में अपने नापाक आतंकी हरकतों, कंधार हाईजैक और 26/11 मुंबई हमलों का गुनहगार था। फिल्‍म में उसकी मौत 2014 के बाद दिखाई गई है। ये भी कि उसे हमारे जाबांज सीक्रेट एजेंट ने मारा। जबकि असल में इलियास कश्‍मीरी की मौत 3 जून 2011 को ही हो गई थी। वह एक अमेरिकी ड्रोन हमले ने दक्षिण वजीरिस्तान जिले के ग्वाखवा इलाके में स्थित अपने ठिकाने पर था। यह इलाका तालिबान का गढ़ माना जाता था। इस मिसाइल हमले में इलियास कश्मीरी समेत 9 जिहादियों के मारे जाने की खबर थी।

आति‍फ अहमद: फिल्‍म में-

फिल्‍म में हम देखते हैं साल 2000 में, हमज़ा अली मज़ारी जो तब जसकीरत सिंह रंगी था, अपने दोस्‍त पिंडा के साथ उत्तर प्रदेश पहुंचता है। यहां वह बाहुबली नेता आतिफ अहमद से मिलता है, जो असल जिंदगी में दिवंगत सांसद और कुख्‍यात गैंगस्‍टर अतीक अहमद के किरदार से प्रेरित है। हम देखते हैं कि जसकीरत तब आत‍िफ के घर से AK-47 राइफल लेकर आता है। यह भी कि अतीफ ड्रग्‍स और अवैध हथ‍ियारों का धंधा करता है। फिल्‍म में यह भी दिखाया गया कि अतीफ अहमद के ISI के मेजर इकबाल से कनेक्‍शन थे।

यह बात सच है कि अतीक अहमद, एक कुख्यात गैंगस्टर, अपराधी और राजनेता थे। वह समाजवादी पार्टी से भारतीय संसद और उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य भी रहे। अतीक अहमद के खिलाफ 160 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज थे और उसने जेल में रहते हुए भी कई चुनाव लड़े। फिल्‍म में साल 2000 के टाइमलाइन में ही अतीक के ISI कनेक्‍शन को दिखाया गया है। कालक्रम के मुताबिक, तब उत्तर प्रदेश में 28 अक्‍टूबर 2000 से 8 मार्च 2002 तक BJP यानी राजनाथ सिंह की सरकार थी। केंद्र में भी NDA की सरकार थी और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे।

बहरहाल, 2019 में अतीक अहमद को एक गवाह के अपहरण का दोषी ठहराया गया था, जिसने 2005 में हुई राजू पाल की हत्या मामले में अतीक के ख‍िलाफ गवाही दी थी। इसके बाद 15 अप्रैल 2023 को कोर्ट के आदेश पर सजायाफ्ता अतीक अहमद को मेडिकल चेकअप के लिए जाते समय तीन बंदूकधारियों ने अतीक अहमद की हत्‍या कर दी।

पीक ड‍िटेल‍िंग’ बनाम ‘वीक ड‍िटेल‍िंंग’ की बहसकुल मिलाकर, अब जब फिल्‍म और असल जिंदगी के तथ्‍य आपके सामने हैं, तो आदित्‍य धर की यह फिल्‍म PEAK Detailing है या WEAK Detailing ये आप खुद ही तय कर सकते हैं। कही-सुनी बातों पर कोई कितना यकीन करे। वैसे भी, ‘धुरंधर 2’ फिल्‍म के शुरू होने से पहले ही यह ड‍िस्‍क्‍लेमर आता है- यह असल जिंदगी की घटनाओं से प्रेरित एक काल्‍पनिक फिल्‍म है।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version