Monday, June 1
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भारत में प्‍लास्टिक बैंक नोट जारी करने पर जल्‍द मोहर लग सकती है. रिपोर्ट का दावा है कि आरबीआई पॉलिमर करेंसी की प्‍लानिंग कर रहा है, क्‍योंकि इसे बनाने में लागत कम आएगी.

VIJAY KUMAR/ JOURNALIST/ DAILY INDIATIMES

क्‍यों कागजी नोट की तुलना में अच्‍छे होंगे ये नोट? 

भारत में प्‍लास्टिक के नोट जारी करने को लेकर चर्चा तेज हो चुकी है. कई खबरों में दावा किया गया है कि जल्द ही भारत में प्‍लास्टिक के नोट चलन में आ सकते हैं. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में पॉलीमर नोटों की बढ़ती मांग को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इसपर काम भी शुरू कर दिया है. भारत में पॉलीमर नोटों को प्रचलन में लाने के लिए आरबीआई चर्चा कर रहा है. 

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पटना और मुंबई में आयोजित RBI की पिछली दो बोर्ड बैठकों में पॉलिमर या प्‍लास्टिक के नोटों को चलन में लाने के प्रस्‍ताव पर चर्चा हुई है. कहा जा रहा है कि यह नोट कागजी नोट की तुलना में कम खर्च में तैयार हो सकते हैं और इनकी लाइफ भी लंबी और सेफ हो सकती है. इसी कारण इस नोट को चलन में लाने पर विचार किया जा रहा है.

लागत कम होने के साथ ही यह नोट एटीएम मशीन की सपोर्टिव भी होंगी. मतलब एटीएम मशीनें पॉलिमर बेस्‍ड नोट जारी करने में सक्षम होंगी. सूत्रों ने बताया कि आरबीआई के पास ऐसा करने के लिए संसाधन मौजूद हैं. बिजनेस स्टैंडर्ड ने बताया कि केंद्रीय बैंक पॉलिमर नोटों के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट की भी योजना बना रहा है, जिसकी घोषणा निकट भविष्य में की जा सकती

क्‍यों कागजी नोट रिप्‍लेस करने की मांग?

RBI की वित्त वर्ष 2025 की सालाना रिपोर्ट से पता चला है कि कागजी नोटों की छपाई पर होने वाला खर्च पिछले वित्त वर्ष के 5,101.4 करोड़ रुपये से बढ़कर 6,372.8 करोड़ रुपये हो गया है. बिजनेस स्टैंडर्ड ने बताया कि यह बढ़ोतरी खासतौर पर नोटों की छपाई की बढ़ती मांग के कारण हुई है. इसके अलावा, वित्त वर्ष 2025 के दौरान लगभग 23.8 अरब गंदे नोट वापस लिए गए, जो पिछले साल के 21.24 अरब नोटों से 12.3 प्रतिशत अधिक है. हटाए गए नोट में सबसे ज्‍यादा 500 और उसके बाद 100 रुपये के नोट शामिल थे. 

रिपोर्ट के अनुसार, 15 मई तक प्रचलन में मुद्रा में सालाना आधार पर 11.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह रिकॉर्ड 42.86 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गई. डिजिटल भुगतान में निरंतर बढ़ोतरी के बावजूद नकदी की निरंतर मांग को दिखाता है. वित्त वर्ष 2027 के पहले डेढ़ महीनों में प्रचलन में मुद्रा में 1.15 ट्रिलियन रुपये की बढ़ोतरी हुई है. 

सिक्‍कों को लेकर रिपोर्ट में क्‍या दावा? 

सिक्कों के उपयोग को बढ़ाने के लिए आरबीआई के प्रयासों का उम्‍मीद के मुताबिक रिजल्ट नहीं मिले हैं. सिक्कों की आपूर्ति वित्त वर्ष 2024 में लगभग 1.2 अरब सिक्कों से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 1.5 अरब सिक्के हो गई. इनमें से लगभग 80 करोड़ सिक्के 5 रुपये के थे, जबकि उसके बाद लगभग 4 करोड़ 20 रुपये के सिक्के थे. 

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