Thursday, February 19
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देखिए बेटा जब कोई अपना आपको छोड़ देता है आपकी उपेक्षा करता है और ऐसे व्यवहार करने लगता है जैसे आप उसकी जीवन यात्रा में कभी थे ही नहीं तो यह पीड़ा बहुत गहरी होती है। पर याद रखिए यह पीड़ा आपको तोड़ने नहीं आई है। यह आपको जगाने आई है। आज मैं तुम्हें कोई साधारण उपाय नहीं बल्कि मनुष्य के मन को समझने वाले सात गुण मार्ग बताने जा रहा हूं। जो बिना एक शब्द बोले बिना किसी शिकायत के सामने वाले के हृदय और अहंकार दोनों को हिला देते हैं। पहला मार्ग मौन होकर अदृश्य हो जाना। जब कोई तुम्हें हल्के में लेने लगे तो सबसे पहला कार्य यह करो अपनी उपस्थिति हटा लो। ना कोई संदेश ना कोई संकेत ना कोई शिकायत। मनुष्य को सबसे अधिक पीड़ा तब होती है जब जो सदा उपलब्ध था वह बिना कुछ कहे चला जाए। यह मौन उसके मन में प्रश्न पैदा करता है। यह गया कहां? अब इसे फर्क क्यों नहीं पड़ता? और यही प्रश्न धीरे-धीरे पछतावे में बदल जाते हैं। दूसरा मार्ग स्वयं को ऊंचा उठाना। बेटा तुम किसी को नीचा दिखाकर नहीं खुद को ऊंचा उठाकर जीतते हो। अपने शरीर, अपने कर्म, अपने विचार और अपने जीवन को सुधारो। जब वह देखेगा कि तुम उसके बिना भी आगे बढ़ गए तो उसका अहंकार टूटेगा क्योंकि मनुष्य सबसे अधिक तब जलता है जब वह देखता है कि जिसे उसने छोड़ा वह उससे भी श्रेष्ठ हो गया। तीसरा मार्ग शांत उदासीनता ना प्रेम दिखाओ ना क्रोध। बस ऐसे व्यवहार करो जैसे वह अब तुम्हारे जीवन का विषय ही नहीं। जब किसी को यह अनुभव होता है कि अब वह किसी के लिए आवश्यक नहीं रहा तो उसका मन भीतर से टूटने लगता है। याद रखो जिसे समझाना पड़े उसने कभी समझा ही नहीं। चौथा मार्ग उसे अपनी दुनिया से बाहर कर देना। अपनी नई यात्रा जियो पर उसमें उसका नामोनिशान ना हो। नई सोच, नए लोग, नया जीवन जब वह देखेगा कि तुम्हारी दुनिया चल रही है और उसमें उसकी कोई जगह नहीं तो उसे अपनी भूल का आभास होगा। मनुष्य को सबसे अधिक पीड़ा छूट जाने की होती है। पांचवा मार्ग स्मृतियों की चुपचुभन कुछ बातें कही नहीं जाती। बस महसूस कराई जाती है। कभी कोई पंक्ति, कभी कोई स्थान, कभी कोई भाव नाम लिए बिना। और जब वह हर जगह तुम्हें महसूस करने लगे तो समझ लेना उसका मन हार चुका है। बरेवाल की छठा मार्ग खामोशी का प्रहार। बेटा खामोशी कमजोरी नहीं। यह सबसे बड़ी शक्ति है। ना प्रतिक्रिया ना स्पष्टीकरण। जब उसे उत्तर नहीं मिलता तो उसका मन स्वयं से लड़ने लगता है। और जो मनुष्य खुद से हार जाता है उसका पछतावा सबसे गहरा होता है। सातवां मार्ग सच में आगे बढ़ जाना। यह अंतिम और सबसे बड़ा मार्ग है। दिखावे से नहीं मन से आगे बढ़ो। अपना आत्मसम्मान वापस लो। अपनी खुशी को चुनो। और यदि वह लौटे भी तो स्वयं से पूछना। क्या मैं फिर वही जाऊं? जहां मैंने खुद को खो दिया था। जिस दिन तुम सच में आगे बढ़ जाते हो, उसी दिन दुनिया तुम्हारी कीमत समझती है। अंतिम वचन याद रखो बेटा प्रेम में सबसे बड़ी शक्ति शब्दों में नहीं मौन में होती है। और जिसने तुम्हें छोड़ा उसे सबसे बड़ा उत्तर तब मिलता है। जब तुम बिना बोले इतने बदल जाते हो कि वह तुम्हें फिर से पाने योग्य ही ना रहे। और अब बेटा यह जो मैं तुम्हें सब कह रहा हूं, यह किसी को वापस लाने की चाल नहीं है। यह तुम्हें खुद के पास वापस लाने का मार्ग है। क्योंकि सच यह है कि जिस दिन तुम किसी के लौट आने का इंतजार छोड़ देते हो, उसी दिन तुम सच में मुक्त होते हो। मनुष्य अक्सर यह भूल करता है कि जिसने उसे छोड़ा, वही उसे पूरा करेगा। पर ध्यान से सुनो। जिसने तुम्हें अधूरा छोड़ दिया, वह तुम्हें कभी पूरा नहीं कर सकता। असली परिवर्तन यहीं से शुरू होता है। जब तुम सुबह उठते हो और यह नहीं सोचते कि वह क्या कर रहा होगा, क्या सोच रहा होगा, किसके साथ होगा? बल्कि यह सोचते हो कि आज मैं खुद के लिए क्या करूंगा? वही क्षण तुम्हारे जीवन का मोड़ होता है। अब तुम्हारा मन किसी और के व्यवहार पर नहीं अपने कर्म पर टिका होता है। और जब मन अपने कर्म पर टिक जाए तो कोई भी व्यक्ति उसे हिला नहीं सकता जिसे जाना था वो चला गया। बेटा जो चला गया उसे बार-बार मन में बुलाना। अपने ही घाव को कुरेदना है। ईश्वर ने अगर किसी को तुम्हारे मार्ग से हटा दिया तो समझ लो वह तुम्हारी मंजिल का नहीं था। क्योंकि जो सच में तुम्हारे भाग्य में होता है, वह बिना लड़ाई, बिना डर, बिना अपमान तुम्हारे साथ टिकता है। आत्मसम्मान ही सच्चा प्रेम है। आज की दुनिया ने तुम्हें यह सिखा दिया कि प्रेम में झुकना पड़ता है। पर मैं कहता हूं प्रेम में नहीं अहंकार में झुकना पड़ता है। जहां आत्मसम्मान खत्म हो जाए वहां प्रेम नहीं केवल आसक्ति बचती है और आसक्ति मनुष्य को कमजोर बनाती है। जिस दिन तुम खुद को चुनते हो जिस दिन तुम यह कह देते हो मन ही मन अब मुझे किसी को साबित नहीं करना। अब मुझे किसी को रोकना नहीं। अब मुझे किसी से भीख नहीं मांगनी। उस दिन तुम्हारा चेहरा बदल जाता है, तुम्हारी चाल बदल जाती है और तुम्हारी ऊर्जा बदल जाती है। और यही ऊर्जा उस व्यक्ति को सबसे अधिक चुभती है जिसने कभी तुम्हें हल्के में लिया था। अब यदि वह याद करे अगर अब वह तुम्हें याद करे अगर अब उसे पछतावा हो। अगर अब वह लौटना चाहे तो यह तुम्हारी जीत नहीं। यह उसकी सीख है। तुम्हें उसे स्वीकार करना है या नहीं? यह अब तुम्हारी मर्यादा तय करेगी। क्योंकि जो एक बार तुम्हें खोने का साहस कर चुका है, वह दोबारा भी कर सकता है। अंतिम वचन बहुत ध्यान से सुनो। बेटा तुम्हारा जीवन किसी की स्वीकृति से बड़ा है। तुम्हारा अस्तित्व किसी की पसंद से नहीं बना और तुम्हारी शांति किसी के लौट आने पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। जिस दिन तुम यह समझ गए उस दिन ना कोई छोड़ने वाला बड़ा रहेगा ना कोई जाने वाला बस तुम रहोगे तुम्हारा आत्मसम्मान रहेगा और तुम्हारी शांति रहेगी और यही सच्ची विजय

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