Tuesday, July 28
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दिग्गज एडटेक कंपनी बायजू के फाउंडर बायजू रवींद्रन को सिंगापुर की एक अदालत ने 6 महीने जेल की सजा सुनाई है। बायजू चार साल पहले तक देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी थी और दुनियाभर के निवेशकों ने इसमें पैसा लगाया था।

नई दिल्ली: कभी देश की सबसे वैल्यूएबल स्टार्टअप रही बायजू के फाउंडर बायजू रवींद्रन को सिंगापुर की एक अदालत ने 6 महीने जेल की सजा सुनाई है। उन्हें कोर्ट की अवमानना का दोषी मानते हुए यह सजा सुनाई गई है और सजा के लिए 15 जून को पेश होने को कहा गया है। बायजू रवींद्रन को कभी भारतीय स्टार्टअप की सक्सेस स्टोरी का पोस्टर बॉय माना जाता था। इस एडटेक स्टार्टअप की वैल्यू 2022 में 22 अरब डॉलर पहुंच गई थी और उसने वैश्विक निवेशकों से 4 अरब डॉलर से अधिक जुटाए थे। दुनियाभर के निवेशकों ने इसमें पैसा लगाया था और आज वे अपना पैसा पाने के लिए कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे हैं। आखिर अर्श से फर्श पर कैसे आई बायजू?

बायजू की स्थापना 2011 में हुई थी। यह वह दौर था जब देश में स्मार्टफोन का चलन और टेस्ट-प्रेप कल्चर का चलन बढ़ रहा था। लेकिन इसमें असली तेजी कोरोना काल में आई। लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद हो गए और स्टूडेंट ऑनलाइन आ गए। बायजू ने इसका फायदा उठाते हुए आक्रामक मार्केटिंग की, शाहरुख खान और लियोनल मेसी जैसे दिग्गजों को अपना ब्रांड एंबेसेडर बनाया। इसके साथ ही आकाश, ग्रेट लर्निंग और एपिक जैसी कंपनियों का अधिग्रहण किया। इससे कंपनी की इमेज ग्लोबल एडटेक लीडर की बन गई और पैसा बरसने लगा।

कंपनी का घाटा

लेकिन कोरोना महामारी के बाद जैसे ही डिमांड सामान्य हुई, बायजू के रेवेन्यू की रफ्तार मंद हो गई जबकि ऑपरेशन कॉस्ट बढ़ गया। बायजू ने पूरी दुनिया में करीब 3 अरब डॉलर की खरीदारी की। इसके लिए कंपनी ने कर्ज लिया। इसमें से 1.2 अरब डॉलर का कर्ज विदेशी निवेशकों से लिया गया। अधिग्रहण से कंपनी ने दुनियाभर में अपने पैर पसारे लेकिन इससे कॉस्ट बहुत बढ़ गई। फाइनेंशियल ईयर 2022 में ही कंपनी का घाटा 8,245 करोड़ रुपये था जो 2021 की तुलना में करीब दोगुना था।

इसके बाद निवेशकों ने कंपनी के कामकाज पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। ऑडिटर्स ने भी कंपनी के भविष्य को लेकर चिंता जताई। नतीजा यह हुआ कि कंपनी की वैल्यू 22 अरब डॉलर से गिरकर 8 अरब डॉलर रह गई और फिर यह 1 अरब डॉलर तक गिर गई। कंपनी को खुद को बचाए रखने के लिए राइट्स इश्यू और एसेट सेल्स का सहारा लेना पड़ा। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2021 में ऑडिटेड रिजल्ट फाइल करने में 17 महीने लगा दिए।

हीरो से जीरो

कंपनी के ऑडिटर डेलॉयट ने रिजाइन कर दिया और कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री ने भी कंपनी को नोटिस थमा दिया। इससे कंपनी की इमेज को बट्टा लगा। निवेशकों के कान खड़े हो गए और अपना पैसा पाने के लिए वे कानूनी रास्ते तलाशने लगे। कंपनी ने अमेरिका की एक अदालत में लेंडर्स को घसीट लिया जबकि क्रेडिटर्स ने कंपनी पर 533 मिलियन डॉलर के गबन का आरोप लगाया। इसके बाद कंपनी एक के बाद एक कई विवादों में फंसती चली गईआज हालत यह है कि बायजू अपना वजूद बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। बड़े निवेशक निकल चुके हैं और कंपनी खुद को इनसॉल्वेंसी प्रॉसीडिंग से बचाने की जद्दोजहद में लगी है। अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों में बायजू के खिलाफ केस चल रहे हैं। कंपनी के फाउंडर बायजू रवींद्रन की नेटवर्थ भी अप्रैल 2023 की शुरुआत में 2.1 अरब डॉलर थी। लेकिन आज उनकी नेटवर्थ जीरो है।

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