
अमिताभ शर्मा/JOURNALIST/DAILY INDIATIMES
अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े विवादों के कारण ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की कुर्सी खतरे में है। अब उनकी अपनी लेबर पार्टी के एक धड़े ने ही इस्तीफे की मांग कर दी है। हालांकि स्टार्मर अभी पद छोड़ने से इनकार कर रहे हैं।
इस बीच, नए प्रधानमंत्री पद की होड़ में गृह मंत्री शबाना महमूद के साथ ही स्वास्थ्य मंत्री वेस्ट स्ट्रीटिंग और पूर्व उपप्रधानमंत्री अंगेला रेनर का नाम सामने आ रहा है।शबाना महमूद कश्मीर के PoK के मीरपुर मूल की हैं। वह ब्रिटेन की गृह मंत्री बनने वाली पहली मुस्लिम महिला हैं। अगर वह प्रधानमंत्री बनती हैं, तो ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री भी होंगी।
दरअसल, ब्रिटेन में एपस्टीन फाइल से जुड़े विवाद की वजह से पीएम स्टार्मर के सबसे भरोसेमंद सहयोगी और डाउनिंग स्ट्रीट के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी को इस्तीफा देना पड़ा है।मैकस्वीनी पर आरोप है कि उन्होंने यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन का समर्थन करने वाले पीटर मंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत बनाकर भेजा था। मैकस्वीनी ने भी माना है कि यह नियुक्ति गलत थी।

स्टार्मर को चुनौती देने के लिए 20% सदस्यों का समर्थन जरूरी
लेबर पार्टी के नियमों के अनुसार, अगर कोई कीर स्टार्मर के खिलाफ चुनौती देना चाहता है, तो इसके लिए कुछ सख्त शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है कि चुनौती देने वाले उम्मीदवार को पार्टी के संसदीय सदस्यों से कम से कम 20% का समर्थन हासिल करना जरूरी है।यह नियम 2021 में पार्टी कॉन्फ्रेंस में बदलाव के बाद लागू हुआ था। पहले यह सीमा सिर्फ 10% थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 20% कर दिया गया है ताकि कोई भी आसानी से लीडरशिप चुनौती न दे सके और पार्टी में स्थिरता बनी रहे।अभी लेबर पार्टी के कुल सांसदों की संख्या लगभग 404-405 के आसपास है, इसलिए किसी भी चुनौती को आगे बढ़ाने के लिए कम से कम 81 लेबर सांसदों का लिखित समर्थन जुटाना पड़ता है।इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच होम मिनिल्टर शबाना महमूद को उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है। 45 साल की शबाना महमूद पहले न्याय मंत्री और लॉर्ड चांसलर रह चुकी हैं।
शबाना महमूद ब्रिटेन की पहली महिला मुस्लिम सांसदों में शामिल
बर्मिंघम में पाकिस्तानी माता-पिता के यहां जन्मी शबाना महमूद ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है। वह पेशे से बैरिस्टर हैं। 2010 में रुशानारा अली और यास्मिन कुरैशी के साथ वह ब्रिटेन की पहली महिला मुस्लिम सांसदों में शामिल हुईं।लेबर पार्टी में वे कीर स्टार्मर की करीबी सहयोगी मानी जाती हैं और पार्टी के दक्षिणपंथी (राइट-विंग) गुट से जुड़ी हैं। वे इमिग्रेशन (प्रवासन) नीतियों पर काफी सख्त रवैया रखती हैं और कहती हैं कि ब्रिटेन में रहना एक विशेषाधिकार है।2010 में संसद पहुंचने के कुछ ही महीनों बाद उन्हें पार्टी की अहम जिम्मेदारी दे दी गई थी। बाद में वह लेबर पार्टी की राष्ट्रीय चुनाव अभियान की जिम्मेदार बनीं और पार्टी की चुनावी रणनीति में उनकी बड़ी भूमिका रही।

