Temple Giving Money as Prasad: जहां देश के अधिकांश मंदिरों में भक्तों को बताशे या मिश्री का प्रसाद मिलता है, वहीं राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में एक ऐसा मंदिर भी है जहां भक्तों की झोली ‘धन’ से भर दी जाती है

VISHNU AGARWAL EDITOR DAILY INDIATIMES DIGITAL JOURNALISM PLATFORM
Temple Giving Money as Prasad: जहां देश के अधिकांश मंदिरों में भक्तों को बताशे या मिश्री का प्रसाद मिलता है, वहीं राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में एक ऐसा मंदिर भी है जहां भक्तों की झोली ‘धन’ से भर दी जाती है। बेगूं क्षेत्र के प्रसिद्ध बानोड़ा बालाजी धाम स्थित श्रीलक्ष्मी रानी मंदिर के पट गुरुवार को शरद पूर्णिमा के अवसर पर खोले गए, तो नजाराअद्भुत था।
भक्ति और भव्यता का संगम
भक्तों का विश्वास है कि इस प्रसाद को घर की तिजोरी या दुकान के गल्ले में रखने से साल भर बरकत बनी रहती है और दरिद्रता दूर होती है। मेले जैसा माहौल देखते ही बन रहा था। मंदिर को आकर्षक झांकियों से सजाया गया और माता को छप्पन भोग लगाया गया। राजस्थान के भीलवाड़ा, कोटा, उदयपुर के साथ-साथ मध्य प्रदेश के नीमच और मंदसौर से भी हजारों लोग कतारों में खड़े नजर आए। व्यवस्था को संभालने के लिए बानोड़ा बालाजी सेवा मंडल के कार्यकर्ता मुस्तैद रहे। यह आस्था का अनूठा संगम है, जो आधुनिक दौर में भी लोगों को भूमि की ओर खींचता है।
छह महीने का इंतजार और उमड़ा जनसैलाब
इस मंदिर के कपाट साल में केवल दो बार शरद पूर्णिमा व चैत्र पूर्णिमा पर ही खुलते हैं। छह महीने के लंबे इंतजार के बाद जब पंडित कैलाश चंद्र शर्मा ने विधिवत पूजा कर पट खोले, तो माता के दर्शन और विशेष धन-प्रसाद पाने के लिए हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा
धन-प्रसाद’ की विशेषता ?
यहां आने वाले हर श्रद्धालु को एक विशेष पोटली दी जाती है। इस पैकेट में मेवे और भभूत के साथ 1 रुपए से लेकर 2500 तक के असली नोट और सिक्के शामिल होते हैं। भक्त इसे केवल पैसा नहीं, बल्कि माता लक्ष्मी का साक्षात आशीर्वाद मानते हैं।
घर परिवार में आर्थिक समृद्धि
किसी भी श्रद्धालु के पैकेट में 1, 2, 5, 10 रुपए के सिक्के और 10, 20, 50, 100, 200, 500 रुपए में से कुछ भी नोट हो सकता है। मान्यता है कि यहां से वितरित सिक्के ओर नोट के प्रसाद को संभाल कर रखने से घर परिवार में आर्थिक समृद्धि आती है। ऐसे में यहां नगर एवं आसपास के गांवो सहित चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, कोटा, उदयपुर, नीमच, मंदसौर, सिंगोली आदि स्थानों से श्रद्धालु धन का प्रसाद लेने यहां सुबह से कतार में लग गए।
