
China Economy: चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए दो मोर्चों पर प्लान बनाया है। इसमें घरेलू बाजार को मजबूत करना और तकनीकी क्षेत्र में प्रगति हासिल करना है।
नई दिल्ली: चले तो चांद तक, ना चले तो रात तक… यह वो लाइन है जो चीन में बने सामान के लिए भारत में कही जाती है। दरअसल, चीन भारत के मुकाबले काफी सस्ते सामान बनाता है। इस कारण भारत समेत कई देशों में इनकी खपत ज्यादा होती है। लेकिन कोई गारंटी नहीं होती कि वे कितने दिनों तक सही काम करेंगे। यही कारण है कि चीन में बने ज्यादातार सामान पर दुकानदार कोई गारंटी नहीं देते हैं। ऐसे में चीन पर सस्ता माल बनाकर बेचने का टैग लगा हुआ है। लेकिन चीन अब इसे बदलना चाहता है।
चीन की संसद के वार्षिक सत्र में दो अहम आर्थिक योजनाओं को पेश किया गया है। इन प्लान में यह साफ कर दिया है कि देश आने वाले वर्षों में टेक्नोलॉजी आधारित अर्थव्यवस्था बनाने और अमेरिका से तकनीकी प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करने पर बड़ा दांव लगाने जा रहा है। चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए दो मोर्चों पर प्लान बनाया
क्या है चीन का प्लान?
साल 2026 के लिए सरकार की आर्थिक योजना में सबसे पहली प्राथमिकता मजबूत घरेलू बाजार का निर्माण बताया गया है।वहीं दूसरे स्थान पर तकनीकी प्रगति को तेज करना रखा गया है।अगले पांच वर्षों का प्लान है कि टेक्नोलॉजी में बड़ी उपलब्धियां हासिल की जाएं।
टेक्नोलॉजी बनेगी चीन की ताकत
चीन को दुनियाभर में सस्ते सामान बनाने के लिए जाना जाता है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अब इस टैग को हटाना चाहते हैं। उनकी योजना है कि चीन को कम लागत वाले मैन्युफैक्चरिंग मॉडल से निकालकर हाई-टेक इकनॉमी में बदला जाए। नेशनल पीपुल्स कांग्रेस में बोलते हुए शी जिनपिंग ने साइंस एंड टेक्नोलॉजी में इनोवेशन और रणनीतिक बढ़त हासिल करने पर जोर दिया।
बड़ा निवेश कर रहा चीन
अमेरिका ने चीनी कंपनियों के लिए हाई क्वालिटी सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी तक पहुंच सीमित कर दी है। इसके बाद चीन ने आत्मनिर्भरता की रणनीति तेज कर दी है। चीन सेमीकंडक्टर, बैटरी, बायोमेडिसिन और नई तकनीकों में बड़े निवेश कर रहा है। चीन अपने घरेलू यात्री विमान C919 के उत्पादन को बढ़ाने और स्वदेशी जेट इंजन विकसित करने की दिशा में भी तेजी ला रहा है।
भारत की क्या स्थिति?
बात अगर टेक्नोलॉजी वाली अर्थव्यवस्था की करें तो इसमें भारत भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। पिछले महीने 1 फरवरी को पेश हुए बजट में टेक्नोलॉजी को प्राथमिकता दी गई है। इसमें मैन्युफैक्चरिंग और एआई को विशेष महत्व दिया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) के लिए आवंटन को 22,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। वहीं सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की शुरुआत 1000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ की गई है। यानी चीन की तरह भारत भी टेक्नोलॉजी वाली अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।